लग्न कुंडली और नवांश कुंडली क्या है? जानें D-9 चार्ट का महत्व, अंतर और ज्योतिषीय रहस्य
लग्न कुंडली और नवांश कुंडली (D-9 Chart) क्या होती है? जानें जन्म कुंडली और नवांश कुंडली का महत्व, दोनों में अंतर, विवाह, भाग्य, करियर और ग्रहों की वास्तविक शक्ति पर इनका प्रभाव।
लग्न कुंडली और नवांश कुंडली क्या है? जानें ज्योतिष में D-9 चार्ट का महत्व
वैदिक ज्योतिष में किसी भी व्यक्ति के जीवन का विश्लेषण करने के लिए लग्न कुंडली (Birth Chart) और नवांश कुंडली (D-9 Chart) का विशेष महत्व माना जाता है। ज्योतिषाचार्य किसी जातक के स्वभाव, विवाह, भाग्य, करियर और आध्यात्मिक प्रगति का आकलन करने के लिए इन दोनों कुंडलियों का अध्ययन करते हैं।अगर किसी व्यक्ति के जीवन स्वभाव, विवाह, धर्म, आध्यात्मिक उन्नति से लेकर भाग्य के बारे में जानना होता है, तो दोनों कुंडली का संयुक्त रूप से आलंकन करना बेहद जरूरी माना जाता है। केवल जन्म कुंडली देखकर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सकता है। लेकिन नवमांश कुंडली से ग्रहों की आंतरिक शक्ति और वास्तविक फल के बारे में बता सकते हैं। आइए जानते हैं लग्न कुंडली और नवांश कुंडली का क्या है अर्थ, महत्व और अंतर…
लग्न कुंडली क्या होती है?
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, व्यक्ति के जन्म के समय पूर्वी क्षितिज जो राशि उदित हो रही होती है, तो उसे लग्न कहा जाता है। इसी को कुंडली का पहला भाव मानकर लग्न कुंडली यानी जन्म कुंडली बनाई जाती है। ऋषि पराशर द्वारा रचित बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में लग्न के महत्व के बारे में श्लोक के माध्यम से बताया गया है
लग्न कुंडली के द्वारा इन चीजों को देखा जाता है
व्यक्ति के व्यक्तित्व और स्वभाव के बारे में लग्न कुंडली के माध्यम से जाना जा सकता है।
स्वास्थ्य और आयु
शिक्षा और करियर
धन और संपत्ति
परिवार और संतान
सामाजिक पद- प्रतिष्ठा
जीवन की प्रमुख घटनाओं के बारे में
नवांश कुंडली क्या होती है?
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में नवांश यानी D-9 Chart को सबसे महत्वपूर्ण विभाजन कुंडलियों में से एक है। प्रत्येक राशि को 9 समान भागों में विभाजित किया जाता है। इन नौ भागों से जो कुंडली बनती है, उसे नवांश कुंडली कहा जाता है। इस कुंडली के माध्यम से जातक को भाग्य, धर्म, विवाह और जीवन के परिपक्व परिणामों के साथ ग्रहों की सूक्ष्म शक्ति के बारे में पता चल सकता है।
फलदीपिका में नवांश का महत्व
दक्षिण भारत के महान ज्योतिषी ऋषि मंत्रेश्वर ने हिंदू वैदिक ज्योतिष का एक अत्यंत प्रसिद्ध और प्रामाणिक ग्रंथ फलदीपिका लिखा है जिसमें नवांश के महत्व के बारे में बताया गया है।
नवांश कुंडली में क्या-क्या देखा जाता है
विवाह और दांपत्य जीवन
जीवनसाथी का स्वभाव
भाग्य और धर्म
आध्यात्मिक उन्नति
ग्रहों की वास्तविक शक्ति
विवाह के बाद जीवन में आने वाले परिवर्तन
शास्त्रों में नवांश का महत्व
वैदिक ज्योतिष के एक प्रमुख ग्रंथ ‘षट्पंचाशिका’ (Shatpanchashika) में नवांश के महत्व को बताते हुए कहा गया है कि ग्रहों का नवांश वर्ग (9वां विभाजन) उनकी वास्तविक आंतरिक क्षमता और बल को परखने का सबसे उत्तम पैमाना माना जाता है।
ज्योतिष में लग्न और नवांश कुंडली का संयुक्त महत्व
वैदिक ज्योतिष के आचार्यों को लेकर इसका मत है कि केवल जन्मकुंडली देखकर निर्णय नहीं भविष्य या वर्तमान को लेकर बिल्कुल भी निर्णय नहीं करना चाहिए। अगर कोई ग्रह जन्म कुंडली में मजबूत दिख रहा हो लेकिन नवांश में कमजोर हो, तो उसका फल अपेक्षा से कम हो सकता है। वहीं जन्म कुंडली में सामान्य दिखाई देने वाला ग्रह यदि नवांश में शक्तिशाली हो, तो समय आने पर उत्कृष्ट परिणाम दे सकता है।