लक्ष्मी योग, गौरी योग, शुभमाला और अशुभमाला योग: जानें कुंडली में बनने वाले इन शुभ-अशुभ योगों का प्रभाव
जानें कुंडली में लक्ष्मी योग, गौरी योग, शुभमाला योग और अशुभमाला योग कैसे बनते हैं, इनका ज्योतिषीय महत्व क्या है और इन योगों का व्यक्तित्व, धन, करियर, परिवार व जीवन पर संभावित प्रभाव।
कुंडली में बनने वाले लक्ष्मी योग, गौरी योग, शुभमाला योग और अशुभमाला योग: जानें इन योगों का महत्व और व्यक्तित्व पर प्रभाव
वैदिक ज्योतिष में कई ऐसे शुभ योग बताए गए हैं, जो व्यक्ति के जीवन में धन, प्रतिष्ठा, ज्ञान और सफलता के संकेत माने जाते हैं। इनमें लक्ष्मी योग, गौरी योग, शुभमाला योग और अशुभमाला योग का विशेष उल्लेख मिलता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन योगों का प्रभाव व्यक्ति के स्वभाव, करियर और जीवन की दिशा पर पड़ सकता है। हालांकि इनका वास्तविक फल संपूर्ण जन्म कुंडली, ग्रहों की दशा और दृष्टि पर निर्भर करता है।
कैसे बनते हैं शुभमाला, मालिका, लक्ष्मी और गौरी योग?
श्लोक सर्वे पञ्चसु षट्सु सप्तसु शुभा मालाश्च पङ्क्त्या स्थिता यद्येवं मृतिषड्व्ययादिषु गृहेष्वत्राशुभाख्याः स्मृताः । स्वर्क्षोच्चे यदि कोणकण्टकयुतौ भाग्येशशुक्रावुभौ लक्ष्म्याख्योऽथ तथाविधे हिमकरे गौरीति जीवेक्षिते ॥२१
इस श्लोक में चार योग बताये हैं । शुभ माला, अशुभ माला, लक्ष्मी और गौरी । इन चारों योगों को क्रमशः बताते हैं। शुभ माला योग- यदि सब ग्रह पंक्ति से पांचवें, छठे, सातवें घरों में हों तो शुभ माला योग होता है। अशुभ माला योग- यदि समस्त ग्रह छठे, आठवें, बारहवें इन स्थानों में क्रम से हों तो अशुभ माला योग होता है। लक्ष्मी योग- यदि नवें स्थान का स्वामी और शुक्र दोनों अपने घर में या उच्चराशि में स्थित होकर लग्न से केन्द्र या त्रिकोण में हों तो लक्ष्मी योग होता है। गौरी योग- यदि चन्द्रमा स्वराशि या उच्चराशि का होकर लग्न से केन्द्र या त्रिकोण में हो और बृहस्पति उसे देखता हो तो गौरी योग होता है
सुमाला योग में जन्मा व्यक्ति जनाधिकारी क्षितिपालशस्तो भोगी प्रदाता परकार्यकर्ता । बन्धुप्रियः सत्सुतदारयुक्तो धीरः सुमालाइ्वययोगजातः ॥२२॥ जो व्यक्ति सुमाला या शुभमाला योग में उत्पन्न होता है वह अनेक व्यक्तियों पर अधिकार रखने वाला भोगी, दाता, बन्धुप्रिय, उत्तम स्त्री पुत्रों से युक्त और धीर हो । और राजा द्वारा प्रशंसित या सम्मानित हो । ऐसा व्यक्ति 'परकार्यकर्ता' हो। 'परकार्यकर्ता' शब्द के दो अर्थ हैं। दूसरे का कार्य करने वाला अर्थात् नौकरी पेशा हो । इस शब्द का दूसरा अर्थ हो सकते है दूसरे का उपकार करने वाला
मालिका योग में जन्मा व्यक्ति कुमार्गयुक्तोऽशुभमालिकारख्ये दुःखी परेषां वधकृत् कृतघ्नः । स्यात्कातरो भूसुरभक्तिहीनो लोकाभिशप्तः कलहप्रियः स्यात् ॥२३॥ जो अशुभ मालिका योग में उत्पन्न होते हैं वे दूसरों का वध करने वाले, कृतघ्न, कलहप्रिय (झगड़ालू) और कुमार्गगामी होते हैं। ऐसे लोग कायर होते हैं और लोग उनकी निन्दा करते हैं । ऐसे व्यक्ति ब्राह्मणों का (या बड़ों का) सम्मान नहीं करते और दुःख उठाते हैं। लक्ष्मी योग में जन्मा व्यक्ति नित्यं मङ्गलशीलया वनितया क्रीडत्यरोगी धनी तेजस्वी स्वजनान् सुरक्षति महालक्ष्मीप्रसादालायः । श्रेष्ठान्दोलिकाया प्रयाति तुरगस्तम्बेरमध्यासितो लोकानन्दकरो महीपतिवरो दाता च लक्ष्मीभवः ॥२४||
गौरी योग में जन्मा व्यक्ति सुन्दरगात्रः श्लाघितगोत्रः पार्थिवमित्रः सद्गुणपुत्रः । पङ्कजवक्त्रः संस्तुतजन्त्रो राजति गौरीयोगसमुत्थः ।। २५ ।। जो गौरी योग में उत्पन्न हो वह सुन्दर शरीर वाला, राजा का मित्र, सद्गुणों और पुत्रों से युक्त, शत्रुओं को जीतने वाला, प्रशंसित हो। उसकी वंश की सब लोग प्रशंसा करें और उसका मुख कमल के समान हो। संक्षेप में, इसे भी बहुत शुभ योग माना गया है