जन्म कुंडली के 12 भावों में चंद्रमा का प्रभाव: जानें हर भाव में चंद्र ग्रह के शुभ-अशुभ फल

जन्म कुंडली के 12 भावों में चंद्रमा का क्या प्रभाव पड़ता है? जानें लग्न से लेकर द्वादश भाव तक चंद्र ग्रह के शुभ-अशुभ फल, मानसिक स्थिति, करियर, विवाह, धन, स्वास्थ्य, संतान, भाग्य और फलदीपिका के अनुसार चंद्रमा के ज्योतिषीय प्रभाव की विस्तृत जानकारी।

Published On 2026-07-01 16:12 GMT   |   Update On 2026-07-01 16:12 GMT

जन्म कुंडली के 12 भावों में चंद्रमा का प्रभाव: जानें हर भाव में चंद्र ग्रह के शुभ-अशुभ फल

वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं, माता, मानसिक शांति, कल्पनाशक्ति और संवेदनशीलता का कारक माना जाता है। पारंपरिक ज्योतिष ग्रंथों, जैसे फलदीपिका, में चंद्रमा की 12 भावों में स्थिति के आधार पर विभिन्न प्रकार के फल बताए गए हैं। हालांकि किसी भी निष्कर्ष के लिए पूरी जन्म कुंडली, ग्रहों की दृष्टि, राशि, दशा और अन्य योगों का संयुक्त विश्लेषण आवश्यक माना जाता है।

लग्न भाव में चंद्रमा

फलदीपिका ग्रंथ के अनुसार, अगर शुक्ल पक्ष का चंद्रमा लग्न में हो तो व्यक्ति निर्भय, दृढ़ शरीर वाला, बलवान, लक्ष्मीवान और दीर्घायु होता है। लेकिन वहीं अगर कृष्ण पक्ष का चंद्रमा हो तो इसका विपरीत फल मिल सकता है यानी इन फलों में कमी हो सकती है।

श्लोक

सिते चन्द्रे लग्ने दृढतनुरदम्त्रायुरभयो।

बलिष्ठो लक्ष्मीवान् भवति विपरीतं क्षयगते।

द्वितीय भाव में चंद्रमा

द्वितीय भाव में चंद्रमा होने से व्यक्ति का स्वभाव मधुर होने के साथ-साथ सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी हो सकती है। इन्हें स्वादिष्ट भोजन करने का काफी शौक होता है। इसके साथ ही इन्हें सुख-सुविधाओं के साथ लेना काफी पसंद होता है। ये एक अच्छे डांसर होने के साथ-साथ कई कलाओं में निपुण होते हैं। हालांकि कभी-कभी इनकी वाणी में विचित्रता या अस्थिरता देखने को मिलती है।

तृतीय भाव में चंद्रमा

तृतीय भाव का चंद्रमा होने से जातकों का भाई-बहनों का सुख प्रदान करता है। ऐसा व्यक्ति मनस्वी, बलशाली, साहसी होने के साथ-साथ दृढ़ निश्चयी होता है। लेकिन ऐसा व्यक्ति काफी कंजूस होता है। अगर चंद्रमा शुक्ल पक्ष में होकर इस भाव में आता है, तो जातकों को निरंतर वृद्धि हो सकती है। हर क्षेत्र में सफलता के साथ शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। वहीं दूसरी ओर कृष्ण पक्ष का चंद्रमा के इस भाव में आने से उसके विपरीत फल की प्राप्ति हो सकती है।

चतुर्थ भाव में चंद्रमा

चतुर्थ भाव में चंद्रमा होने पर जातक को सुखों की प्राप्ति होती है। इसके अच्छे मित्र बनते हैं। इसके साथ ही इन्हें वाहन, भूमि, संपत्ति प्राप्त हो सकती है।  ऐसा व्यक्ति सुखी, भोगी तथा उदार स्वभाव का होता है।

श्लोक-

सुखी भोगी त्यागी सुहृद् ससुह्द्वाहनयशा:

सुपुत्रो मेधावी मृदुगतिरामत्य: सुतगते।

क्षतेअल्पायुश्चंद्रअमतिरुदरगोरी परिभवी

स्मरे दृष्टे सौम्यो वरयुवतिकान्ताअतिसुभग: ॥६॥

पंचम भाव में चंद्रमा

जन्मकुंडली के पंचम भाव का चंद्रमा है तो जातकों की मधुर वाणी होने के साथ-साथ काफी बुद्धिमान होते हैं। इन्हें संगीत से काफी प्रेम होता है। इन्हें उत्तम संतान की प्राप्ति होती है। ऐसा व्यक्ति राजा का मंत्री यानी शासन या प्रशासन में महत्वपूर्ण पद प्राप्त कर सकता है। ऐसे में वह सरकार में सलाहकार या मंत्री जैसे कार्यों में सफलता हासिल कर सकता है।

षष्ठ भाव में चंद्रमा

छठे भाव में स्थित चंद्रमा जातक को शारीरिक रूप से बलवान तो होता है, लेकिन पेट से संबंधित समस्याओं से परेशान रहता है। इसे अपने जीवन में कई बार शत्रुओं का सामना करना पड़ता है और जीवन में संघर्ष अधिक रहता है। इनकी वाणी काफी सौम्य होती है और ये बलशाली होते हैं।

सप्तम भाव में चंद्रमा

सातवें भाव में चंद्रमा होने पर व्यक्ति आकर्षक व्यक्तित्व वाला होता है। उसे सुंदर एवं प्रेम करने वाला जीवनसाथी मिलती है।  वैवाहिक जीवन हमेशा अच्छा रहता है। पति-पत्नी के बीच प्रेम बना रहता है।

अष्टम भाव में चंद्रमा

आठवें भाव का चंद्रमा होना काफी शुभ नहीं माना जाता है। इस भाव में चंद्रमा होने से जातक को कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसे मानसिक तनाव से लेकर किसी न किसी रोग से परेशान रहते हैं। और आयु में कमी की संभावना मानी गई है। हालांकि वास्तविक फल संपूर्ण कुंडली के विश्लेषण पर निर्भर करते हैं।

नवम भाव में चंद्रमा

नौवें भाव में स्थित चंद्रमा काफी शुभ माना जाता है। इस भाव में चंद्रमा के होने से व्यक्ति का अध्यात्म की ओर काफी अधिक झुकाव हो सकता है। ऐसे में जातक धार्मिक, पुण्य कर्म करने वाला होता है। वह काफी भाग्यशाली होता है। इसके साथ ही संतान सुख भी प्राप्त करता है।

दशम भाव में चंद्रमा

दशम भाव का चंद्रमा का होना काफी लाभकारी माना  जाता है। इस भाव में चंद्रमा के होने से जातक हर क्षेत्र में सफलता हासिल हो सकती है। ये जिस काम में हाथ लगाता है, तो उसमें सफल होता है। ऐसे व्यक्ति समाज में मान-सम्मान पाते हैं। इसके साथ ही ये लोग शुभ कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इसको सज्जनों की संगति से उसे विशेष लाभ मिलता है।

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