पद्मिनी एकादशी व्रत कथा 2026: पढ़ें पुरुषोत्तम एकादशी / कमला एकादशी की पौराणिक कथा
Padmini Ekadashi Vrat Katha 2026: जानें पद्मिनी एकादशी की पौराणिक कथा, व्रत का महत्व, पूजा विधि और भगवान विष्णु की कृपा से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।
पद्मिनी एकादशी व्रत कथा 2026: पढ़ें पुरुषोत्तम एकादशी / कमला एकादशी की पौराणिक कथा
Padmini Ekadashi Vrat Katha 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। अधिक मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली पद्मिनी एकादशी को पुरुषोत्तम एकादशी और कई स्थानों पर कमला एकादशी भी कहा जाता है।
यह व्रत भगवान भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से जीवन के दुख दूर हो सकते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है।
पद्मिनी एकादशी 2026 कब है?
व्रत तिथि: 27 जून 2026, शनिवार
यह एकादशी अधिक मास में पड़ रही है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
पद्मिनी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में राजा कृतवीर्य नाम के एक धर्मात्मा राजा थे। उनके पास धन, वैभव और बड़ा राज्य था, लेकिन उन्हें संतान सुख प्राप्त नहीं था।
राजा और उनकी पत्नी इस दुख से बहुत परेशान रहते थे। उन्होंने कई यज्ञ, दान और पूजा की, लेकिन उन्हें संतान प्राप्ति नहीं हुई।
इसके बाद राजा अपनी पत्नी के साथ वन में तपस्या करने चले गए। वहां उन्होंने वर्षों तक भगवान विष्णु की आराधना की, लेकिन फिर भी मनोकामना पूरी नहीं हुई।
एक दिन माता माता अनुसूया वहां आईं। रानी ने उनसे अपनी समस्या बताई। तब माता अनुसूया ने उन्हें अधिक मास की शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।
रानी ने श्रद्धा और नियमपूर्वक पद्मिनी एकादशी का व्रत किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया।
कुछ समय बाद राजा को एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई, जिसने आगे चलकर महान पराक्रमी राजा के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त की।
तभी से पद्मिनी एकादशी व्रत को संतान सुख, समृद्धि और मनोकामना पूर्ण करने वाला व्रत माना जाता है।
माता अनसूया का उपदेश
रानी पद्मिनी की भक्ति और पतिव्रता धर्म से प्रसन्न होकर माता अनसूया ने कहा—
“हे देवी! अधिकमास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहा जाता है। यदि आप इस व्रत को विधिपूर्वक करें और भगवान विष्णु की आराधना करें, तो निश्चित ही आपकी मनोकामना पूर्ण होगी।”
माता अनसूया ने रानी को व्रत की संपूर्ण विधि बताई। रानी पद्मिनी ने अत्यंत श्रद्धा और नियमपूर्वक पद्मिनी एकादशी का व्रत किया। उन्होंने पूरी रात जागरण किया, भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन किए और द्वादशी तिथि में ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दी।
भगवान विष्णु का प्रकट होना
रानी पद्मिनी की कठोर भक्ति और व्रत से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए। वे गरुड़ पर सवार होकर प्रकट हुए और बोले—
“हे देवी! मैं तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न हूं। वर मांगो।”
रानी ने हाथ जोड़कर कहा-
“प्रभु! मेरे पति को ऐसा तेजस्वी और बलवान पुत्र प्राप्त हो, जो तीनों लोकों में प्रसिद्ध हो।”
भगवान विष्णु ने “तथास्तु” कहा और अंतर्ध्यान हो गए।
कुछ समय बाद रानी पद्मिनी ने एक अत्यंत पराक्रमी पुत्र को जन्म दिया। वही पुत्र आगे चलकर कार्तवीर्य अर्जुन के नाम से प्रसिद्ध हुआ। कहा जाता है कि उसमें हजार भुजाओं का बल था और उसने अनेक युद्धों में विजय प्राप्त की।