श्रावण मास में क्यों किया जाता है भगवान शिव का जलाभिषेक? जानें धार्मिक महत्व, आध्यात्मिक संदेश और सावन में अभिषेक का रहस्य

श्रावण मास में भगवान शिव का जलाभिषेक क्यों किया जाता है? जानें सावन में जलाभिषेक का धार्मिक महत्व, आध्यात्मिक संदेश, शिव स्वरूप और जल अर्पित करने की परंपरा।

Published On 2026-08-01 17:29 GMT   |   Update On 2026-08-01 17:29 GMT

श्रावण मास में क्यों किया जाता है भगवान शिव का जलाभिषेक? जानें इसका धार्मिक महत्व और आध्यात्मिक संदेश

श्रावण (सावन) का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। इस पूरे मास में शिव भक्त शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान भोलेनाथ की आराधना करते हैं। आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के अनुसार, जलाभिषेक केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समर्पण, आंतरिक शुद्धि और मन की शांति का प्रतीक भी है।

कैसा है भोलेनाथ का स्वरूप?

भगवान शिव का स्वरूप कैसा है? शास्त्रों में कहा गया है, “ब्रह्मांड व्याप्त देहाय” अर्थात उनका शरीर इस संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है। जब उनका शरीर संपूर्ण सृष्टि में व्याप्त है, तो कोई उन पर जल कैसे अर्पित कर सकता है?

सावन में शिव जी का जलाभिषेक करने का महत्व

श्रावण मास में वर्षा होती है, मानो गगन से वसुधा का अभिषेक हो रहा हो। ऐसा प्रतीत होता है मानो संपूर्ण सृष्टि ही आकाश से जल का अभिषेक प्राप्त कर रही हो। वर्षा से सब कुछ धुलकर पावन और शुद्ध हो जाता है तथा पृथ्वी सौंदर्य से पल्लवित हो उठती है। पृथ्वी उनके चरण हैं, जबकि आकाश और नक्षत्रों के मंडल उनके कंठ की माला हैं। भगवान शिव इस मास में बरसते बादलों के माध्यम से स्वयं अपना अभिषेक करते हैं, इसीलिए भगवान शिव की आराधना के लिए इस मास को सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

जब समस्त सृष्टि स्वयं को उस दिव्यता में डुबो देती है, तो मानव जाति भी स्वाभाविक रूप से इसमें लीन हो जाती है। हम सृष्टि और परमात्मा के साथ एकाकार हो जाते हैं तथा उस परमेश्वर की महिमा का गान करते हैं, इसीलिए श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा और आराधना करने का विधान है।

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