सावन 2026: क्या नाम जप करने वालों को प्याज-लहसुन खाना चाहिए? प्रेमानंद जी महाराज ने बताया सही मार्ग

सावन 2026 में क्या नाम जप करने वालों को प्याज-लहसुन खाना चाहिए? जानें प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार प्याज-लहसुन, सात्त्विक भोजन, तमोगुण और भक्ति का क्या संबंध है।

Published On 2026-08-01 17:35 GMT   |   Update On 2026-08-01 17:35 GMT

सावन 2026: क्या नाम जप करने वालों को प्याज-लहसुन खाना चाहिए? प्रेमानंद जी महाराज ने बताया क्या है सही मार्ग

सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और सात्विक जीवनशैली के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान कई लोग व्रत रखते हैं और प्याज-लहसुन का सेवन छोड़ देते हैं। इसी विषय पर एक श्रद्धालु के प्रश्न का उत्तर देते हुए प्रेमानंद जी महाराज ने बताया कि नाम जप करने वालों के लिए सात्विक भोजन अधिक उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इसका मन और साधना पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

क्या लहसुन-प्याज खाने से लगता है पाप?

इस सवाल का जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि यदि कभी भूलवश कुछ ऐसा खा लिया तो क्या होगा? इसमें घबराने की आवश्यकता नहीं है। बस इतना ध्यान अवश्य रखना चाहिए कि भूल से भी मांस या अंडा न खाएं। लेकिन यदि कभी प्याज-लहसुन वाला भोजन मिल गया और खा लिया, तो स्पष्ट रूप से समझ लीजिए कि प्याज-लहसुन खाना पाप नहीं है

लहसुन-प्याज में किसी जीव की हत्या नहीं होती। जैसे आलू पैदा होता है, वैसे ही प्याज और लहसुन भी उत्पन्न होते हैं। लेकिन ये अत्यंत तमोगुणी हैं। इसलिए हमारे संतों और भगवत समाज ने इनका त्याग करने की शिक्षा दी है, क्योंकि ये तमोगुण, प्रमाद, आलस्य और पाप प्रवृत्ति को बढ़ाते हैं।

यह मत सोचिए कि जब प्याज-लहसुन छोड़ेंगे, तभी नाम जप करेंगे। कौन जाने तब तक जीवन रहे या न रहे। केवल इस कारण अपना जीवन व्यर्थ मत जाने दीजिए। बहुत से विद्यार्थी, नौकरी करने वाले और व्यापारी देश-विदेश में रहते हैं। उनसे हम यही कहेंगे कि मांस मत खाइए, शराब मत पीजिए, अंडा मत खाइए, क्योंकि इनमें जीव हिंसा है और बुद्धि का भी नाश होता है। जहां तक संभव हो प्याज-लहसुन से भी बचने का प्रयास करिए। लेकिन यदि ऐसी मजबूरी हो कि बिना प्याज-लहसुन का भोजन उपलब्ध न हो, तो भगवान का स्मरण करते हुए भोजन करिए, राधा-राधा जपिए। आपका मंगल होगा, आपका कल्याण निश्चित होगा। इसमें डरने की कोई आवश्यकता नहीं है।

बस आहार शुद्ध रखो और संग शुद्ध रखो, तब विचार भी शुद्ध रहेंगे। यदि घर में लहसुन-प्याज खाया जाता है, तो समझ लो कि वह तमोगुण बढ़ाने वाला आहार है। उससे मंत्र की वृत्ति में बाधा आती है। कई बार घर में पत्नी कहती है कि क्या तुम्हारे कारण हम भी न खाएं? क्या यह अमृत है? लेकिन देखो, बिना प्याज-लहसुन के भी कितना स्वादिष्ट भोजन बनता है। वृंदावन में ठाकुर जी को छप्पन भोग लगते हैं, उनमें प्याज-लहसुन नहीं होता। इन्हें केवल तमोगुण के कारण त्यागा गया है। इनमें दुर्गंध भी होती है। यदि कोई प्याज-लहसुन खाकर सामने बात करे, तो उसकी गंध महसूस होती है। पता नहीं लोग इन्हें इतना क्यों पसंद करते हैं। इनमें कोई विशेष लाभ नहीं है।

तमोगुण से भरपूर होता है लहसुन-प्याज

प्रेमानंद महाराज जी आगे कहते हैं कि इस संसार में तीन गुण हैं—सत्त्व, रज और तम। भजन करने के लिए सात्त्विक वृत्ति और निर्मल बुद्धि चाहिए। इसलिए रजोगुण और तमोगुण बढ़ाने वाले आहार का त्याग करना आवश्यक है। जिस भूमि में आलू होता है, उसी भूमि में प्याज, लहसुन और गाजर भी उगते हैं। भूमि अपवित्र नहीं होती, लेकिन इनकी प्रकृति तमोगुणी मानी गई है। इसी कारण इन्हें भजन में बाधक समझकर त्यागा जाता है। बिना प्याज-लहसुन के भी पूरी जिंदगी बहुत अच्छे से जी जा सकती है। स्वाद की आदत ही सब कुछ है। जैसे जो व्यक्ति तंबाकू नहीं खाता, उसे उसकी गंध से उल्टी आने लगेगी, लेकिन जो खाता है, उसे वही अच्छा लगता है। इसी प्रकार यदि स्वाद प्याज-लहसुन का पकड़ लिया, तो उसे छोड़ना कठिन लगता है।

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