घर में किस दिशा में होनी चाहिए किचन? वास्तु के अनुसार जानें सही दिशा, गैस और सिंक रखने के नियम

Vastu Tips For Kitchen: घर बनाते समय किचन की दिशा पर विशेष ध्यान दिया जाता है। वास्तु शास्त्र में रसोई को अग्नि तत्व से जोड़ा गया है, इसलिए इसकी दिशा और अंदर गैस चूल्हे, सिंक व अन्य सामान की जगह को लेकर कई पारंपरिक मान्यताएं हैं। वास्तु के अनुसार दक्षिण-पूर्व यानी आग्नेय कोण किचन के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। अगर इस दिशा में किचन बनाना संभव न हो तो उत्तर-पश्चिम यानी वायव्य कोण को दूसरा विकल्प माना जाता है।

आइए जानते हैं घर में किचन किस दिशा में होनी चाहिए और वास्तु के अनुसार रसोई से जुड़े किन नियमों का ध्यान रखना चाहिए।

किचन के लिए कौन सी दिशा सबसे शुभ मानी जाती है?

वास्तु की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दक्षिण-पूर्व दिशा किचन के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। इस दिशा का संबंध अग्नि तत्व से माना जाता है और रसोई में भी अग्नि का प्रमुख स्थान होता है। इसलिए किचन को आग्नेय कोण में रखने की सलाह दी जाती है।

यदि घर की बनावट के कारण दक्षिण-पूर्व में किचन बनाना संभव नहीं है, तो उत्तर-पश्चिम दिशा को वैकल्पिक स्थान माना जाता है।

उत्तर-पूर्व दिशा में किचन क्यों नहीं बनानी चाहिए?

वास्तु मान्यताओं में उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण को पूजा, जल और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए इस दिशा में किचन बनाने से आम तौर पर बचने की सलाह दी जाती है।

इसी तरह दक्षिण-पश्चिम दिशा में भी किचन को लेकर वास्तु में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

गैस चूल्हा किस दिशा में रखना चाहिए?

किचन की दिशा के साथ गैस चूल्हे की स्थिति भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। वास्तु के अनुसार गैस स्टोव को किचन के दक्षिण-पूर्व हिस्से में रखना शुभ माना जाता है।

खाना बनाते समय व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा की ओर होना बेहतर माना जाता है।

इसका मतलब है कि गैस चूल्हे को इस तरह व्यवस्थित किया जा सकता है कि खाना बनाते समय आपका चेहरा पूर्व दिशा की ओर रहे।

किचन में सिंक किस दिशा में रखें?

वास्तु में गैस को अग्नि और सिंक को जल तत्व से जोड़ा जाता है। इसलिए दोनों को बिल्कुल पास-पास रखने के बजाय इनके बीच उचित दूरी रखना बेहतर माना जाता है।

पारंपरिक वास्तु सलाह के अनुसार सिंक या पानी का स्थान उत्तर अथवा उत्तर-पूर्व दिशा में रखा जा सकता है।

फ्रिज और भारी सामान कहां रखें?

किचन में फ्रिज, अनाज के डिब्बे और भारी स्टोरेज को रखने के लिए वास्तु में दक्षिण और पश्चिम दिशा को उपयुक्त माना जाता है। इससे किचन का उत्तर-पूर्व हिस्सा अपेक्षाकृत हल्का और खुला रखा जा सकता है।

हालांकि, फ्रिज या भारी सामान रखते समय सबसे पहले पर्याप्त वेंटिलेशन, बिजली की सुरक्षित व्यवस्था और उपयोग में आसानी का ध्यान रखना जरूरी है।

किचन का दरवाजा किस दिशा में होना चाहिए?

वास्तु की कुछ परंपराओं में किचन का प्रवेश द्वार पूर्व, उत्तर या पश्चिम दिशा की ओर होना बेहतर माना जाता है। साथ ही किचन का दरवाजा घर के मुख्य दरवाजे के ठीक सामने रखने से बचने की सलाह दी जाती है।

किचन में खिड़की और वेंटिलेशन का रखें ध्यान

किचन में पर्याप्त रोशनी और हवा का होना बहुत जरूरी है। खाना पकाते समय धुआं और गर्मी बाहर निकलने के लिए उचित वेंटिलेशन होना चाहिए।

इसलिए वास्तु के साथ-साथ आधुनिक किचन डिजाइन में खिड़की, एग्जॉस्ट फैन और चिमनी की सही व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए।

किचन में किन बातों से बचना चाहिए?

वास्तु की मान्यताओं के अनुसार किचन बनाते समय इन बातों का ध्यान रखा जा सकता है—

उत्तर-पूर्व दिशा में किचन बनाने से बचें।

गैस चूल्हे और सिंक को बिल्कुल पास न रखें।

किचन में गंदगी जमा न होने दें।

गैस स्टोव को ऐसी जगह न रखें जहां हवा की वजह से आग का खतरा बढ़े।

किचन में पर्याप्त रोशनी और वेंटिलेशन रखें।

भारी सामान को व्यवस्थित तरीके से रखें।

गैस पाइपलाइन, बिजली के कनेक्शन और उपकरणों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।

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