फाल्गुन पूर्णिमा 2026: कब है लक्ष्मी जयंती? जानें तारीख, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व आसान भाषा में

Falgun Purnima 2026 Date and Significance: फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा 2026 की सही तारीख, तिथि का प्रारंभ और समाप्ति समय, ब्रह्म मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और स्नान-दान का महत्व जानें आसान भाषा में। इस दिन को लक्ष्मी जयंती भी माना जाता है क्योंकि समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी के प्रकट होने की मान्यता है। साथ ही इसी तिथि पर होली और होलिका दहन का उत्सव मनाया जाता है। पढ़ें फाल्गुन पूर्णिमा पर क्या करें, कौन-से मंत्र जपें और किस समय स्नान-दान करना रहेगा सबसे शुभ।

Published On 2026-02-19 16:14 GMT   |   Update On 2026-02-19 16:14 GMT

फाल्गुन पूर्णिमा 2026: तारीख, शुभ मुहूर्त, स्नान-दान और धार्मिक महत्व 

Falgun Purnima 2026 Date and Significance: हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा साल की एक प्रमुख पूर्णिमा तिथि होती है, जो फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के रूप में मनाई जाती है। इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कला में होता है और यह धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा होली से ठीक पहले पड़ रही है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

इस दिन गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद दान करने का विधान है, जिसे करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता है। हर माह की पूर्णिमा अपने आप में महत्वपूर्ण होती है, लेकिन फाल्गुन पूर्णिमा का स्थान अलग ही है। इसे लक्ष्मी जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इस कारण फाल्गुन पूर्णिमा को सौभाग्य, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। साथ ही, इस दिन किए गए स्नान और दान के शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं कि फाल्गुन पूर्णिमा 2026 कब पड़ेगी और इस दिन स्नान-दान का सही समय क्या रहेगा।

फाल्गुन पूर्णिमा 2026 कब है?

फाल्गुन पूर्णिमा 2026 2 मार्च की शाम 5:55 बजे से शुरू होकर 3 मार्च 2026 की शाम 5:08 बजे तक रहेगी।

इस तिथि का उदया-काल (पूर्णिमा का दिन) 3 मार्च 2026 को माना जाएगा, जब भक्त स्नान, दान-पुण्य और पूजा-पाठ करते हैं

फाल्गुन पूर्णिमा 2026 स्नान-दान मुहूर्त 

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस दिन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:19 बजे से 6:08 बजे तक रहेगा, जो स्नान-दान के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है। इसके अलावा, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:27 बजे से 1:14 बजे तक रहेगा, जो भी इस पुण्य कार्य के लिए बहुत शुभ समय है। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय शाम 6:44 बजे होगा, जो दिन के धार्मिक और शुभ कार्यों को पूर्ण करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

फाल्गुन पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा का दिन चंद्रमा की पूर्ण कला का प्रतीक है, और यह दिन यज्ञ, स्नान-दान, पूजा-पाठ तथा व्रत का श्रेष्ठ अवसर होता है। पूर्णिमा के दिन किए गए धार्मिक कर्मों का पुण्यफल अधिक माना जाता है।

फाल्गुन पूर्णिमा का महत्व खासकर इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसी दिन होली और होलिका दहन जैसे उत्सव भी मनाए जाते हैं, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक हैं।

फाल्गुन पूर्णिमा पर क्या करें

फाल्गुन पूर्णिमा के पवित्र दिन भक्त निम्न कार्य कर सकते हैं:

1. शुभ स्नान

सुबह के शुभ समय में नदी या गंगाजल से स्नान करें, जिससे मानसिक शांति और पवित्रता आती है।

2. दान-पुण्य

गरीबों को भोजन, वस्त्र या अनाज दान करना शुभ फलदायी माना जाता है।

3. पूजा-पाठ

भक्त घर में या मंदिर में भगवान की पूजा, मंत्र जाप जैसे “ॐ नमः शिवाय”, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” आदि का जाप कर सकते हैं।

 4. पूर्णिमा व्रत

जो व्यक्ति चाहें वे पूर्णिमा का व्रत रखकर आध्यात्मिक शक्ति और भाग्य की वृद्धि की प्रार्थना कर सकते हैं।

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