धुंडिराज चतुर्थी 2026: कब है मनोरथ चतुर्थी? जानें तिथि, व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

Dhundiraj Chaturthi 2026 Date: फाल्गुन मास की चतुर्थी को मनाई जाने वाली धुंडिराज चतुर्थी, जिसे मनोरथ चतुर्थी भी कहा जाता है, भगवान गणेश को समर्पित एक विशेष व्रत है। वर्ष 2026 में यह व्रत 21 फरवरी, शनिवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से गणेश जी की पूजा, व्रत और मंत्र जाप करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस लेख में जानें धुंडिराज चतुर्थी 2026 की सही तिथि, पूजा विधि, व्रत नियम, चंद्र दर्शन का महत्व और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपाय, जिससे करियर, विवाह और धन से जुड़ी परेशानियां दूर हो सकती हैं।

Published On 2026-02-18 16:46 GMT   |   Update On 2026-02-18 16:46 GMT

धुंडिराज चतुर्थी 2026: कब है मनोरथ चतुर्थी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

Dhundiraj Chaturthi 2026 Date: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देव माना जाता है। हर महीने आने वाली चतुर्थी तिथि गणेश जी को समर्पित होती है, लेकिन फाल्गुन मास की चतुर्थी को विशेष रूप से धुंडिराज चतुर्थी या मनोरथ चतुर्थी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के विघ्न दूर होते हैं। आइए जानते हैं धुंडिराज चतुर्थी 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसका धार्मिक महत्व।

धुंडिराज चतुर्थी 2026 कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की चतुर्थी तिथि को धुंडिराज चतुर्थी मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह व्रत 21 फरवरी 2026, शनिवार को रखा जाएगा।

इस दिन भक्त भगवान गणेश का व्रत रखकर सुख, समृद्धि और सफलता की कामना करते हैं।

धुंडिराज चतुर्थी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता कहा जाता है। धुंडिराज चतुर्थी के दिन व्रत और पूजा करने से—

जीवन की बाधाएं दूर होती हैं

कार्यों में सफलता मिलने के योग बनते हैं

परिवार में सुख-शांति बनी रहती है

धन और समृद्धि में वृद्धि होती है

मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से गणेश जी की आराधना करने पर अधूरे कार्य भी पूर्ण होने लगते हैं।

धुंडिराज चतुर्थी पूजा विधि

धुंडिराज चतुर्थी के दिन पूजा करते समय इन बातों का ध्यान रखें—

सुबह स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें।

पूजा स्थान को स्वच्छ कर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।

गणेश जी को दूर्वा, लाल फूल, मोदक और लड्डू अर्पित करें।

गणेश मंत्र या गणेश चालीसा का पाठ करें।

शाम को चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करें।

धुंडिराज चतुर्थी व्रत के लाभ

ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से—

मानसिक तनाव कम होता है

विवाह और करियर से जुड़ी बाधाएं दूर होती हैं

संतान सुख और पारिवारिक खुशहाली प्राप्त होती है

आर्थिक स्थिति मजबूत होने के योग बनते हैं

धुंडिराज चतुर्थी पर क्या करें?

गणेश जी को गुड़ और तिल का भोग लगाएं

जरूरतमंदों को दान करें

“ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें

नए कार्य की शुरुआत के लिए दिन शुभ माना जाता है

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