चैत्र नवरात्रि 2026 Day 4: मां कूष्मांडा पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती

चैत्र नवरात्रि 2026 के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा कैसे करें? जानें पूजा विधि, मंत्र, भोग, आरती और मां कूष्मांडा का महत्व। पढ़ें पूरी जानकारी और प्राप्त करें सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य का आशीर्वाद।

Published On 2026-03-21 16:37 GMT   |   Update On 2026-03-21 16:37 GMT

चैत्र नवरात्रि 2026 Day 4: मां कूष्मांडा पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती

चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। साल 2026 में यह दिन 22 मार्च को मनाया जाएगा। मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचयिता माना जाता है—मान्यता है कि इन्होंने अपनी हल्की मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। माना जाता है कि मां कूष्मांडा की पूजा करने से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है, साथ ही सभी दुखों और बाधाओं का नाश होता है। आइए जानते हैं मां कूष्मांडा की पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती, जिससे आप उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

मां कूष्मांडा का स्वरूप

मां कूष्मांडा, मां दुर्गा का चौथा स्वरूप मानी जाती हैं और उनका रूप बेहद तेजस्वी व दिव्य होता है। उन्हें सृष्टि की रचयिता कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि उन्होंने अपनी हल्की सी मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की उत्पत्ति की थी। मां कूष्मांडा का वर्ण (रंग) स्वर्ण के समान चमकदार बताया गया है, जिससे उनका रूप अत्यंत आकर्षक और उज्ज्वल दिखाई देता है। वे सिंह पर सवार रहती हैं, जो शक्ति और साहस का प्रतीक है। मां के आठ हाथ होते हैं, इसलिए उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा होती है, जबकि एक हाथ में जपमाला रहती है। मां कूष्मांडा का यह स्वरूप शक्ति, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।

मां कूष्मांडा की पूजा विधि

चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस दिन सच्चे मन और श्रद्धा से पूजा करने पर मां की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ, हल्के या हरे रंग के वस्त्र पहनें। इसके बाद मां कूष्मांडा का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। घर के पूजा स्थान पर मां कूष्मांडा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। गंगाजल से स्थान को शुद्ध करें और दीपक जलाएं। मां को कुमकुम, अक्षत, फूल (खासकर पीले या लाल), धूप और दीप अर्पित करें।

मां कूष्मांडा के मंत्र

मूल मंत्र

ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥

स्तुति मंत्र

सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च।

दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

इन मंत्रों का जाप करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने

मां कूष्मांडा का प्रिय भोग

मालपुआ

खीर

हलवा

हरे फल (जैसे अंगूर, केला)

खासतौर पर मालपुआ का भोग बहुत शुभ माना जाता है

मां कूष्मांडा की आरती

कूष्मांडा जय जग सुखदानी।

मुझ पर दया करो महारानी॥

पिगंला ज्वालामुखी निराली।

शाकंबरी मां भोली भाली॥

लाखों नाम निराले तेरे।

भक्त कई मतवाले तेरे॥

भीमा पर्वत पर है डेरा।

स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥

सबकी सुनती हो जगदम्बे।

सुख पहुंचती हो मां अम्बे॥

तेरे दर्शन का मैं प्यासा।

पूर्ण कर दो मेरी आशा॥

मां के मन में ममता भारी।

क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥

तेरे दर पर किया है डेरा।

दूर करो मां संकट मेरा॥

मेरे कारज पूरे कर दो।

मेरे तुम भंडारे भर दो॥

तेरा दास तुझे ही ध्याए।

भक्त तेरे दर शीश झुकाए

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