सोम प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की पूजा कैसे करें? जानें संपूर्ण पूजा विधि, शिव आरती, मंत्र और व्रत के नियम

Som Pradosh Vrat Puja Vidhi: जानें सोम प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की पूजा कैसे करें। पढ़ें संपूर्ण पूजा विधि, आवश्यक पूजा सामग्री, शिवलिंग अभिषेक की सही प्रक्रिया, महामृत्युंजय मंत्र, 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र, भगवान शिव की आरती, व्रत के नियम, क्या करें और क्या न करें। शिव कृपा प्राप्त करने के लिए प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व भी जानें।

Published On 2026-07-11 17:28 GMT   |   Update On 2026-07-11 17:28 GMT

सोम प्रदोष व्रत पर कैसे करें भगवान शिव की पूजा? जानें संपूर्ण पूजा विधि, शिव आरती, मंत्र और व्रत के नियम

सनातन धर्म में सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। जब प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है तथा शिव कृपा बनी रहती है।

यदि आप पहली बार सोम प्रदोष व्रत कर रहे हैं या इसकी सही पूजा-विधि जानना चाहते हैं, तो यहां पूरी जानकारी दी गई है।

सोम प्रदोष व्रत पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

पूजा शुरू करने से पहले ये सामग्री तैयार कर लें

भगवान शिव या शिवलिंग

गंगाजल

शुद्ध जल

दूध

दही

शहद

घी

शक्कर

बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला)

धतूरा (यदि उपलब्ध हो)

भस्म

चंदन

सफेद फूल

अक्षत (चावल)

धूप और दीपक

मौसमी फल

मिठाई

नारियल

सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि

1. प्रातः स्नान करें

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ एवं सात्विक वस्त्र धारण करें।

2. व्रत का संकल्प लें

भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें और पूरे दिन सात्विक आचरण का पालन करें।

3. प्रदोष काल में पूजा करें

प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का शुभ समय) भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।

4. शिवलिंग का अभिषेक करें

शिवलिंग पर क्रमशः जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें। अंत में स्वच्छ जल अर्पित करें।

5. पूजा सामग्री अर्पित करें

अभिषेक के बाद शिवलिंग पर

बेलपत्र

चंदन

सफेद फूल

धतूरा

भस्म

धूप

दीप

अर्पित करें।

6. मंत्र जाप करें

पूजा के दौरान निम्न मंत्रों का जाप करें

ॐ नमः शिवाय।

महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

7. शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ करें

यदि समय हो तो शिव चालीसा, रुद्राष्टक या शिव पुराण का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।

8. भगवान शिव की आरती करें

पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद सभी में बांटें।

भगवान शिव की आरती

ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु जय शिव ओंकारा।

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।

हंसासन गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥

दो भुज चार चतुर्भुज, दस भुज अति सोहे।

तीनों रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥

अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी।

त्रिपुरारी कंसारी, कर माला धारी॥

श्वेताम्बर पीताम्बर, बाघम्बर अंगे।

सनकादिक गरुणादिक, भूतादिक संगे॥

कर में श्रेष्ठ कमंडल, चक्र त्रिशूलधारी।

सुखकारी दुखहारी, जगपालनकारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु जय शिव ओंकारा॥

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