अमलकी एकादशी 2026: तारीख, शुभ मुहूर्त, व्रत पारण, मंत्र, आरती और पूजा विधि — आसान हिंदी में पूरी जानकारी

अमलकी एकादशी 2026 कब है? जानें फाल्गुन शुक्ल एकादशी की सही तिथि, शुभ योग, पूजा मुहूर्त, व्रत पारण का समय, भगवान विष्णु मंत्र और श्री विष्णु आरती। पढ़ें आसान हिंदी में पूरी पूजा विधि और धार्मिक महत्व।

Published On 2026-02-25 16:17 GMT   |   Update On 2026-02-25 16:17 GMT

अमलकी एकादशी 2026: तारीख, शुभ मुहूर्त, मंत्र, आरती और पूजा विधि

Amalaki Ekadashi 2026 Date & Significance: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत शुभ व्रत माना जाता है। हर माह की एकादशी तिथि का अपना विशेष महत्व होता है, लेकिन फाल्गुन मास की एकादशी, जिसे अमलकी एकादशी या रंगभरी एकादशी कहा जाता है, भक्तों के लिए पुण्य और समृद्धि का उत्तम अवसर होती है।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, जीवन में शांति आती है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

इस दिन भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। साथ ही काशी में इस दिन से ही होली के पर्व की शुरुआत होती है, इसलिए इसे रंगभरी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी हर साल फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को सच्ची श्रद्धा से करने पर पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इस साल आमलकी एकादशी  27 फरवरी को मनाई जाएगी। वहीं इस दिन सर्वार्थ सिद्धि, रवि, आयुष्मान और सौभाग्य योग बन रहा है। इसलिए इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है।

अमलकी एकादशी 2026 कब है?

तिथि: फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी, दिनांक: 17 मार्च 2026, मंगलवार पूजा, व्रत और पारण की विधि इसी दिन की तिथि के अनुसार की जाती है।

आमलकी एकादशी 2026 शुभ योग और मुहूर्त

फ्यूचर पंचांग के मुताबिक आमलकी एकादशी के दिन सर्वार्थ सिद्धि, रवि, आयुष्मान और सौभाग्य योग बन रहा है। इस योगों में पूजा करने का दोगुना फल प्राप्त होता है। साथ ही इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा के लिए शुभ समय सुबह 6:48 से 11:08 तक रहेगा।

आमलकी एकादशी व्रत पारण 2026

आमलकी एकादशी का व्रत पारण 28 फरवरी 2026 को सुबह 6 बजकर 48 मिनट से लेकर 9 बजकर 5 मिनट तक की अवधि में किया जाएगा।

एकादशी व्रत मंत्र (विष्णु भगवान)

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:

श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभांगम्। लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् वंदे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।। 

एकादशी पर करें ये आरती श्री विष्णु आरती (Shri Vishnu Aarti)

ऊँ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

ऊँ जय जगदीश हरे।

जो ध्यावे फल पावे, दु:ख विनसे मन का।

स्वामी दु:ख विनसे मन का।

सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

ऊँ जय जगदीश हरे।

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।

स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।

तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी

ऊँ जय जगदीश हरे।

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।

स्वामी तुम अन्तर्यामी।

पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

ऊँ जय जगदीश हरे।

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।

स्वामी तुम पालन-कर्ता।

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥

ऊँ जय जगदीश हरे।

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।

स्वामी सबके प्राणपति।

किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥

ऊँ जय जगदीश हरे।

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

स्वामी तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

ऊँ जय जगदीश हरे।

विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।

स्वमी पाप हरो देवा।

श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥

ऊँ जय जगदीश हरे।

श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।

स्वामी जो कोई नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥

ऊँ जय जगदीश हरे।

अमलकी एकादशी 2026 भगवान विष्णु की भक्ति और आत्मशुद्धि का पवित्र अवसर है। यदि श्रद्धा, पूजा-विधि और व्रत नियमों के साथ यह व्रत किया जाए, तो व्यक्ति को धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होने की मान्यता है। यह पूर्ण दिन शुभता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाने वाला है।

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