किचन वास्तु टिप्स: रसोई बनवाते समय रखें इन बातों का ध्यान, घर में बनी रहेगी सकारात्मक ऊर्जा

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Published On 2026-07-22 17:33 GMT   |   Update On 2026-07-22 17:33 GMT

किचन वास्तु टिप्स: रसोई बनवाते समय रखें इन बातों का ध्यान, घर में बनी रहेगी सकारात्मक ऊर्जा और परिवार रहेगा स्वस्थ

वास्तु शास्त्र में रसोईघर को घर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना गया है, क्योंकि यहीं भोजन तैयार होता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार किचन में अग्नि, जल और वायु तत्वों का संतुलन परिवार के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि से जुड़ा माना जाता है। हालांकि इन मान्यताओं के वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन साफ-सुथरा, हवादार और सुव्यवस्थित किचन व्यावहारिक रूप से भी स्वास्थ्य और सुविधा के लिए लाभदायक होता है।

किचन बनाने के लिए सबसे अच्छी दिशा

वास्तु चिंतामणि ग्रंथ के अनुसार,  रसोई घर के लिए सर्वश्रेष्ठ दिशा आग्नेय कोण माना जाता है।  पूर्व और दक्षिण दिशा के बीच का कोना यानी दक्षिण-पूर्व को आग्नेय कोण कहा जाता है। इसके स्वामी ग्रह शुक्र और देवता अग्नि हैं। अशुभ घटनाओं का अग्नि निवारण करती है। अग्नि का कार्य है जलाना या भस्म करना। ऐसे में इस दिशा में किचन बनवाने से  घर की सभी आपत्तियां भस्म होती हैं। इसलिए इस दिशा में गैस चूल्हा, इंडक्शन, स्टोव आदि रखना लाभकारी माना जाता है।

किचन बनवाते समय ध्यान रखें ये बातें

किचन बनाते समय इस तरह चूल्हा रखें कि खाना बनाने वाले व्यक्ति का मुख पूर्व की ओर होना चाहिए। ऐसा होने से आरोग्य वर्धक मिलता है।

किचन में चूल्हा इस तरह से रखा होना चाहिए कि द्वार से न दिख रहा हो। वास्तु के अनुसार, द्वार से चूल्हा दिखने से परिवार को पूर्ण हानि होने की संभावना हे।

रसोई घर में अनावश्यक चीजें न रखें। बल्कि किचन से संबंधित सामग्री यानी ग्राइंडर, मिक्सर, खल बट्टा, ओखली आदि वहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से सुख समाधान दायक होता है।

किचन में खाना बनाते समय किसी भी प्रकार की बेकार की बातें, लड़ाई-झगड़े आदि नहीं करना चाहिए। इससे वहां का वातावरण दूषित होता है।

घर में किचन बनवाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अगर उत्तर या पूर्व दिशा में सड़क हैं, तो कभी भी ईशान कोण की ओर किचन नहीं बनाना चाहिए। इससे पारिवारिक कलह तथा धन हानि का संताप भोगना पडता है।

यदि पूर्व एवं दक्षिण में सड़क है और आग्नेय कोण में रसोईघर है तो सबसे अच्छा माना जाता है।

यदि घर के उत्तर में सड़क हो तथा मकान में उत्तर में रसोई घर बनाया जाए तो यह अशुभ तथा विपरीत फलदायक होता है।

यदि भूखण्ड के दक्षिण एवं पश्चिम में सड़क हो तथा किसी कारण आग्नेय में रसोई घर बनाना संभव न हो तो इसका निर्माण नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम ) अथवा वायव्य कमरे ( उत्तर-पश्चिम) के आग्नेय भाग में किया जा सकता है।

यदि भूखंड के दक्षिणी भाग में सड़क हो तो वायव्य में रसोई घर बनाए तथा कमरे के आग्नेय भाग में रसोई का प्लेटफार्म बनाएं।

यदि भूखण्ड के उत्तरी एवं पश्चिमी भाग में सड़क हो तथा वायव्य भाग में रसोई घर बनाया जाए तो इसके विलक्षण परिणाम होंगे! अतिथियों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने से घर में रौनक तो रहेगी किन्तु खर्च अधिक होने से गृहिणी के चेहरे की रौनक फीकी बनी रहती है।

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