अधिक मास 2026: कब से शुरू होगा पुरुषोत्तम मास? जानें नियम, महत्व, क्या करें और क्या नहीं

Adhik Maas 2026 / Purushottam Maas: जानें अधिक मास 2026 कब से शुरू और समाप्त होगा। पढ़ें पुरुषोत्तम मास का धार्मिक महत्व, पूजा-विधि, नियम, क्या करें और क्या नहीं। भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए जानें इस पवित्र महीने से जुड़ी खास बातें।

Published On 2026-05-18 17:14 GMT   |   Update On 2026-05-18 17:14 GMT

अधिक मास 2026: कब से शुरू होगा पुरुषोत्तम मास? जानें नियम, महत्व और कथा

Adhik Maas 2026 / Purushottam Maas: हिंदू पंचांग में अधिक मास को बेहद पवित्र और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, जो भगवान भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि इस पूरे महीने पूजा-पाठ, जप, तप, दान और भक्ति करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।वहीं इस मास का अंत 15 जून को होगा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस पूरे महीने में पूजा-पाठ, दान-पुण्य, जप-तप और धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि अधिक मास में किए गए शुभ कार्यों का कई गुना फल प्राप्त होता है। इसलिए इसे एक तरह से पूरे महीने चलने वाला आध्यात्मिक उत्सव भी कहा जाता है। आइए जानते हैं इस महीने क्या करना चाहिए और क्या नहीं…

क्या होता है अधिक मास?

हिंदू पंचांग चंद्रमा और सूर्य की गणना पर आधारित होता है। चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए लगभग हर 32 महीने बाद एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। इस महीने को मलमास भी कहा जाता था, लेकिन भगवान विष्णु ने इसे पुरुषोत्तम नाम देकर विशेष स्थान प्रदान किया। तभी से यह महीना अत्यंत शुभ माना जाने लगा।

अधिक मास में क्या करें?

भगवान विष्णु की पूजा करें

हर दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। पीले फूल, तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करना शुभ माना जाता है। साथ ही सत्यनारायण व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी बहुत शुभ होता है।

मंत्र जाप और पाठ करें

इस महीने में “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना लाभकारी माना जाता है। साथ ही श्रीमद्भागवत गीता, रामचरितमानस और विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी करें।

दान-पुण्य करें

गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, पीली वस्तुएं और धन का दान करना शुभ माना जाता है। इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

सात्विक जीवन अपनाएं

अधिक मास में सात्विक भोजन करें और क्रोध, झूठ, नकारात्मक सोच तथा विवाद से दूर रहने का प्रयास करें।

व्रत और भजन-कीर्तन करें

इस पूरे महीने में भजन-कीर्तन, सत्संग और व्रत रखने का विशेष महत्व माना गया है।

अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए?

मांगलिक कार्यों से बचें

अधिक मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए व्यापार की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते।

तामसिक भोजन न करें

मांसाहार, शराब और नशीली चीजों से दूरी बनाकर रखना शुभ माना जाता है। ऐसा करना शास्त्रों में अधिक मास का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास आत्मशुद्धि, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का महीना होता है। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। मान्यता है कि इस महीने में व्रत, दान, गीता पाठ, रामायण पाठ और विष्णु सहस्रनाम का जाप करने से पापों का नाश होता है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है। और अनैतिक कार्यों से बचना चाहिए।

अधिक मास का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास आत्मशुद्धि, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का महीना होता है। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। मान्यता है कि इस महीने में व्रत, दान, गीता पाठ, रामायण पाठ और विष्णु सहस्रनाम का जाप करने से पापों का नाश होता है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

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