Neem Karoli Baba: कौन थे नीम करौली बाबा? हनुमान जी से था गहरा संबंध, जानें कैंची धाम का इतिहास और रोचक बातें

Neem Karoli Baba: उत्तराखंड के नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम आज देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है। इस धाम की पहचान संत नीम करौली बाबा महाराज जी से जुड़ी हुई है। बाबा को उनके भक्त प्यार से महाराज जी भी कहते हैं। उनकी पहचान भगवान हनुमान के परम भक्त और सेवा, प्रेम व भक्ति का संदेश देने वाले संत के रूप में रही है।

नीम करौली बाबा का जीवन सामान्य सांसारिक जीवन से अलग रहा। उनके जीवन से जुड़ी कई घटनाएं और कथाएं आज भी भक्तों के बीच सुनाई जाती हैं। यही वजह है कि कैंची धाम में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

किसी से पैर नहीं छुलवाते थे

बताया जाता है नीब करौरी बाबा किसी से अपना पैर नहीं छुलवाते थे, जो कोई भी भक्त बाबा के पैर छूने के लिए आगे बढ़ता था वो उसको रोक देते थे। वो कहते थे कि मेरी जगह हनुमान जी का पैर छुओ…वही कल्याण करेंगे।

स्टीव जॉब्स भी जा चुके हैं कैंची धाम

एप्पल के पूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स 1973 में भारत की यात्रा पर आए थे। साथ ही वह कैंची धाम नीम करोली बाबा के दर्शन करने पहुंचे थे, लेकिन बाबा देहांत हो चुका था। बताया जाता है स्टीव जॉब्स कुछ दिन आश्रम में रुके और ध्यान- योग किया।

कैसे प्रसिद्ध हुआ कैंची धाम?

नीब करौरी बाबा का नाम सबसे ज्यादा उत्तराखंड के कैंची धाम से जुड़ा है। नैनीताल-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित यह आश्रम नैनीताल से करीब 17 किलोमीटर दूर है। कैंची धाम में हनुमान मंदिर की स्थापना बाबा से जुड़ी है और 15 जून को यहां स्थापना दिवस के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

नीब करोरी बाबा क्यों कहा जाता है?

बाबा का बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा रखा गया है। वहीं  लक्ष्मी नारायण बड़े हुए तो गृहस्थ छोड़कर साधु बन गए। वहीं घर त्यागने के बाद वह उत्तर प्रदेश के ही फर्रुखाबाद जिले में ‘नीब करोरी’गांव पहुंचे। साथ ही फिर एक गुफा में कठिन तपस्या करने लगे थे। इसी गांव के नाम पर भक्त उन्हें नीब करोरी बाबा कहकर पुकारने लगे। 

जानिए कौन थे नीब करौरी बाबा

नीब करौरी बाबा का मूल नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में हुआ था। नीब करौरी महाराज के पिता का नाम श्री दुर्गा प्रसाद शर्मा था। साथ ही बाबा के बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था और बताया जाता। बाबा की प्रारंभिक शिक्षा अकबरपुर गांव में ही हुई थी।

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