6 अगस्त 2026 का पंचांग: जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल, अष्टमी तिथि, अश्विनी नक्षत्र और गुरुवार के उपाय
6 अगस्त 2026 का पंचांग पढ़ें। जानें श्रावण कृष्ण अष्टमी तिथि, अश्विनी नक्षत्र, ध्रुव योग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय-सूर्यास्त का समय, गुरुवार का धार्मिक महत्व और आसान उपाय।
6 अगस्त 2026 का पंचांग (गुरुवार)
पंचांग विवरण
दिन: गुरुवार
तिथि: श्रावण कृष्ण अष्टमी
पक्ष: कृष्ण पक्ष
मास: श्रावण मास
विक्रम संवत: 2083
सूर्य राशि: कर्क
चंद्र राशि: मेष
ऋतु: वर्षा ऋतु
सूर्योदय: प्रातः 05:49 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:27 बजे
तिथि
श्रावण कृष्ण अष्टमी
अष्टमी तिथि भगवान श्रीकृष्ण, माता दुर्गा और भगवान शिव की उपासना के लिए शुभ मानी जाती है। इस दिन पूजा-पाठ, जप, तप, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है। श्रावण मास में भगवान शिव का जलाभिषेक अत्यंत फलदायी माना जाता है।
नक्षत्र
अश्विनी नक्षत्र
अश्विनी नक्षत्र नए कार्यों की शुरुआत, उपचार, यात्रा, शिक्षा और व्यापार के लिए शुभ माना जाता है। यह नक्षत्र ऊर्जा, तेज़ी और सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है।
योग
ध्रुव योग
ध्रुव योग को स्थिरता, सफलता और दीर्घकालिक लाभ देने वाला शुभ योग माना जाता है। इस योग में किए गए कार्यों के सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना रहती है।
करण
कौलव करण
तैतिल करण
दोनों करण धार्मिक कार्यों, व्यापार, निवेश, यात्रा और शिक्षा से जुड़े कार्यों के लिए शुभ माने जाते हैं।
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 बजे से 12:56 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:45 बजे से 03:41 बजे तक
अमृत काल: प्रातः 08:55 बजे से 10:30 बजे तक
अशुभ समय
राहुकाल: दोपहर 01:30 बजे से 03:00 बजे तक
यमगण्ड काल: प्रातः 06:00 बजे से 07:30 बजे तक
गुलिक काल: प्रातः 09:00 बजे से 10:30 बजे तक
धार्मिक महत्व
गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है। श्रावण मास में भगवान शिव और भगवान विष्णु की संयुक्त पूजा करने से सुख, समृद्धि, ज्ञान और सौभाग्य की प्राप्ति होने की मान्यता है। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ, शिवलिंग का जलाभिषेक और केले के वृक्ष की पूजा करना शुभ माना जाता है।
गुरुवार के उपाय
भगवान शिव का गंगाजल और जल से अभिषेक करें।
भगवान विष्णु को पीले पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।
"ॐ नमः शिवाय" और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
पीली दाल, हल्दी, केले या पीले वस्त्र का दान करें।
गुरुजनों का सम्मान करें और जरूरतमंदों को भोजन कराएं।