4 जुलाई 2026 का पंचांग (शनिवार)

पंचांग विवरण

दिन: शनिवार

तिथि: आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी

पक्ष: कृष्ण पक्ष

मास: आषाढ़

विक्रम संवत: 2083

सूर्य राशि: मिथुन

चंद्र राशि: मकर

ऋतु: वर्षा ऋतु

सूर्योदय: प्रातः 05:32 बजे

सूर्यास्त: सायं 07:42 बजे

तिथि

आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी

चतुर्थी तिथि भगवान श्री गणेश की आराधना के लिए विशेष शुभ मानी जाती है। इस दिन विघ्नहर्ता गणेश की पूजा करने से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं तथा बुद्धि, विवेक और सफलता की प्राप्ति होती है। संकष्टों से मुक्ति और नए कार्यों की सफलता के लिए भी यह तिथि महत्वपूर्ण मानी जाती है।

नक्षत्र

श्रवण नक्षत्र

श्रवण नक्षत्र भगवान विष्णु से संबंधित माना जाता है। यह नक्षत्र शिक्षा, ज्ञान, आध्यात्मिक उन्नति, संचार और नई बातें सीखने के लिए शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र में किए गए कार्यों में धैर्य और अनुशासन बनाए रखना लाभदायक रहता है।

योग

विष्कम्भ योग

विष्कम्भ योग में धैर्य और सोच-समझकर कार्य करना लाभकारी माना जाता है। धार्मिक कार्य, जप, तप और दान-पुण्य के लिए यह योग शुभ माना जाता है।

करण

बव करण

बालव करण

ये दोनों करण सामान्य शुभ कार्यों, शिक्षा, यात्रा और दैनिक कार्यों के लिए अनुकूल माने जाते हैं।

शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: 12:00 PM से 12:51 PM तक

विजय मुहूर्त: 02:43 PM से 03:39 PM तक

अमृत काल: 10:10 AM से 11:45 AM तक

अशुभ समय

राहुकाल: 09:00 AM से 10:30 AM तक

यमगण्ड काल: 01:30 PM से 03:00 PM तक

गुलिक काल: 06:00 AM से 07:30 AM तक

धार्मिक महत्व

शनिवार का दिन शनि देव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। वहीं कृष्ण पक्ष की चतुर्थी होने के कारण भगवान गणेश की पूजा का भी विशेष महत्व है। इस दिन गणेश जी को दूर्वा, मोदक और लाल फूल अर्पित करने से विघ्नों का नाश होता है। शनि देव की पूजा, पीपल के वृक्ष की परिक्रमा और जरूरतमंदों को दान करने से शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है।

शनिवार के उपाय

भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक अर्पित करें।

शनि देव के समक्ष तिल के तेल का दीपक जलाएं।

"ॐ गं गणपतये नमः" और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का जाप करें।

काले तिल, उड़द की दाल या लोहे की वस्तु का दान करें।

पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

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