30 जुलाई 2026 का पंचांग: जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल, श्रवण नक्षत्र, शोभन योग और गुरुवार के उपाय
30 जुलाई 2026 का पंचांग पढ़ें। जानें श्रावण कृष्ण प्रतिपदा की तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, श्रवण नक्षत्र, शोभन योग, करण, सूर्योदय-सूर्यास्त का समय, गुरुवार के उपाय और धार्मिक महत्व।
30 जुलाई 2026 का पंचांग (गुरुवार)
पंचांग विवरण
दिन: गुरुवार
तिथि: श्रावण कृष्ण प्रतिपदा
पक्ष: कृष्ण पक्ष
मास: श्रावण मास
विक्रम संवत: 2083
सूर्य राशि: कर्क
चंद्र राशि: मकर
ऋतु: वर्षा ऋतु
सूर्योदय: प्रातः 05:45 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:33 बजे
तिथि
श्रावण कृष्ण प्रतिपदा
प्रतिपदा तिथि नए कार्यों की योजना बनाने, धार्मिक अनुष्ठान, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए शुभ मानी जाती है। पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष का प्रारंभ होता है, इसलिए यह दिन आत्मचिंतन और नई योजनाओं पर कार्य करने के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।
नक्षत्र
श्रवण नक्षत्र
श्रवण नक्षत्र भगवान विष्णु से संबंधित माना जाता है। यह नक्षत्र ज्ञान, शिक्षा, धर्म, प्रतिष्ठा और उन्नति का प्रतीक है। इस नक्षत्र में शिक्षा, धार्मिक कार्य, यात्रा और महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत करना शुभ माना जाता है।
योग
शोभन योग
शोभन योग शुभ कार्यों, मांगलिक कार्यक्रमों, व्यापार, निवेश, शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस योग में किए गए कार्यों में सफलता और सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना रहती है।
करण
कौलव करण
तैतिल करण
दोनों करण व्यापार, यात्रा, निवेश, शिक्षा और सामान्य शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माने जाते हैं।
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 बजे से 12:56 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:47 बजे से 03:43 बजे तक
अमृत काल: प्रातः 09:10 बजे से 10:45 बजे तक
अशुभ समय
राहुकाल: दोपहर 01:30 बजे से 03:00 बजे तक
यमगण्ड काल: प्रातः 06:00 बजे से 07:30 बजे तक
गुलिक काल: प्रातः 09:00 बजे से 10:30 बजे तक
धार्मिक महत्व
गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है। श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से सुख, समृद्धि, ज्ञान और सौभाग्य की प्राप्ति होने की मान्यता है। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ, शिवलिंग का जलाभिषेक और केले के वृक्ष की पूजा करना शुभ माना जाता है।
गुरुवार के उपाय
भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें।
भगवान विष्णु को तुलसी दल और पीले पुष्प अर्पित करें।
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।
पीली दाल, हल्दी, केले या पीले वस्त्र का दान करें।
जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं और गुरुजनों का सम्मान करें।