3 जुलाई 2026 का पंचांग: जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, नक्षत्र, योग और शुक्रवार के उपाय
शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी, माता संतोषी और देवी शक्ति की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक माता लक्ष्मी की पूजा, व्रत और मंत्र जाप करने से घर में सुख-समृद्धि, धन-वैभव और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। आषाढ़ कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि साधना, आत्मचिंतन और ईश्वर की आराधना के लिए अनुकूल मानी जाती है। इस दिन किए गए दान-पुण्य, जरूरतमंदों की सहायता और धार्मिक कार्यों का विशेष पुण्य प्राप्त होता है। मान्यता है कि तृतीया तिथि पर माता लक्ष्मी की कृपा से आर्थिक परेशानियां दूर होने लगती हैं और जीवन में उन्नति के नए मार्ग खुलते हैं। इसके साथ ही कन्याओं का सम्मान, गौ सेवा, अन्न एवं वस्त्र दान तथा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा करना भी शुभ फलदायी माना गया है। यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा-अर्चना की जाए, तो परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होने की मान्यता है।
3 जुलाई 2026 का पंचांग (शुक्रवार)
पंचांग विवरण
दिन: शुक्रवार
तिथि: आषाढ़ कृष्ण तृतीया
पक्ष: कृष्ण पक्ष
मास: आषाढ़
विक्रम संवत: 2083
सूर्य राशि: मिथुन
चंद्र राशि: मकर
ऋतु: वर्षा ऋतु
सूर्योदय: प्रातः 05:31 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:42 बजे
तिथि
आषाढ़ कृष्ण तृतीया
कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को संयम, साधना और आत्मचिंतन के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन धार्मिक कार्य, दान-पुण्य और ईश्वर की आराधना करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। नए कार्यों की योजना बनाने और अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए भी यह तिथि अनुकूल मानी जाती है।
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र (अधिकांश समय)
इसके बाद श्रवण नक्षत्र का आरंभ होगा।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र स्थिरता, नेतृत्व क्षमता और सफलता का प्रतीक माना जाता है, जबकि श्रवण नक्षत्र ज्ञान, सीखने, संचार और आध्यात्मिक उन्नति से जुड़ा हुआ है।
योग
वैधृति योग
वैधृति योग में महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लेने की सलाह दी जाती है। पूजा-पाठ, जप, दान और आध्यात्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है, जबकि बड़े निवेश या विवादों से बचना बेहतर रहता है।
करण
वणिज करण
विष्टि (भद्रा) करण
भद्रा काल में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: 12:00 PM से 12:51 PM तक
विजय मुहूर्त: 02:43 PM से 03:39 PM तक
अमृत काल: 09:20 AM से 10:55 AM तक
अशुभ समय
राहुकाल: 10:30 AM से 12:00 PM तक
यमगण्ड काल: 03:00 PM से 04:30 PM तक
गुलिक काल: 07:30 AM से 09:00 AM तक
धार्मिक महत्व
शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी और देवी संतोषी की उपासना के लिए विशेष शुभ माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन, वैभव और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। तृतीया तिथि पर दान-पुण्य, कन्याओं का सम्मान और जरूरतमंदों की सहायता करना शुभ फलदायी माना गया है।
शुक्रवार के उपाय
माता लक्ष्मी को कमल का फूल और खीर अर्पित करें।
"ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें।
सफेद मिठाई, चावल या दूध का दान करें।
किसी जरूरतमंद महिला को श्रृंगार का सामान भेंट करें।
घर में घी का दीपक जलाकर माता लक्ष्मी की आरती करें।