1 नवंबर 2026 का पंचांग: रविवार को अहोई अष्टमी, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजा विधि

Aaj Ka Panchang, 1 November 2026: 1 नवंबर 2026 को रविवार का दिन है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि दोपहर 2:52 बजे तक रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन अहोई अष्टमी का पर्व भी मनाया जाएगा। अहोई अष्टमी पर माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए व्रत रखती हैं। वहीं, रविवार का दिन सूर्य देव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है।

1 नवंबर 2026 का पंचांग

दिन: रविवार

मास: कार्तिक (पूर्णिमांत), आश्विन (अमान्त)

पक्ष: कृष्ण पक्ष

तिथि: सप्तमी दोपहर 2:52 बजे तक, इसके बाद अष्टमी

नक्षत्र: पुष्य 2 नवंबर की सुबह 4:30 बजे तक, इसके बाद आश्लेषा

योग: साध्य योग दोपहर 2:39 बजे तक, इसके बाद शुभ योग

करण: बव दोपहर 2:52 बजे तक, इसके बाद बालव

विक्रम संवत: 2083

शक संवत: 1948

चंद्र राशि: कर्क

सूर्य राशि: तुला

सूर्योदय: सुबह 6:36 बजे

सूर्यास्त: शाम 5:44 बजे

चंद्रोदय: रात लगभग 11:45 बजे

चंद्रास्त: दोपहर लगभग 12:49 बजे

ये समय जयपुर के स्थानीय पंचांग के अनुसार दिए गए हैं। अन्य शहरों में समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।

1 नवंबर 2026 के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:54 से 5:45 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक

विजय मुहूर्त: दोपहर 2:01 से 2:46 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:21 से 6:09 बजे तक

प्रदोष काल: शाम लगभग 5:44 से 7:14 बजे तक

शुभ मुहूर्त में पूजा-पाठ, ध्यान और धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं। किसी विशेष मांगलिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि जरूर करें।

1 नवंबर 2026 को राहुकाल का समय

राहुकाल: शाम 4:20 बजे से 5:44 बजे तक

यमगंड काल: दोपहर 12:10 से 1:33 बजे तक

गुलिक काल: दोपहर 2:57 से शाम 4:20 बजे तक

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।

1 नवंबर 2026 को अहोई अष्टमी का महत्व

अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र, सुख और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है। इस दिन माताएं अहोई माता की पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई माता की आराधना करने से संतान के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

अहोई अष्टमी का व्रत मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर शाम के समय अहोई माता की कथा सुनती हैं और तारों के दर्शन करने के बाद व्रत खोलती हैं। कुछ परिवारों में चंद्रमा के दर्शन करके व्रत खोलने की परंपरा भी है।

अहोई अष्टमी की पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

अहोई माता का स्मरण करके संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत का संकल्प लें।

पूजा स्थल पर अहोई माता का चित्र स्थापित करें।

माता को रोली, अक्षत, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें।

शाम के समय दीपक जलाकर अहोई अष्टमी की व्रत कथा सुनें।

अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार तारों या चंद्रमा के दर्शन करके अर्घ्य दें और व्रत खोलें।

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