2 अगस्त 2026 का पंचांग: आज की तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, नक्षत्र, योग और रविवार के उपाय
2 August 2026 Panchang: जानें 2 अगस्त 2026, रविवार का पंचांग। पढ़ें आज की तिथि, नक्षत्र, योग, करण, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय-सूर्यास्त, धार्मिक महत्व और रविवार के उपाय।
2 अगस्त 2026 का पंचांग (रविवार)
पंचांग विवरण
दिन: रविवार
तिथि: श्रावण कृष्ण चतुर्थी
पक्ष: कृष्ण पक्ष
मास: श्रावण मास
विक्रम संवत: 2083
सूर्य राशि: कर्क
चंद्र राशि: कुंभ
ऋतु: वर्षा ऋतु
सूर्योदय: प्रातः 05:47 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:31 बजे
तिथि
श्रावण कृष्ण चतुर्थी
चतुर्थी तिथि भगवान श्रीगणेश की पूजा के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन विघ्नहर्ता गणेश की आराधना करने से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और बुद्धि, सफलता तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। श्रावण मास में भगवान शिव और श्रीगणेश की संयुक्त पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
नक्षत्र
शतभिषा नक्षत्र
शतभिषा नक्षत्र अनुसंधान, चिकित्सा, आध्यात्मिक चिंतन और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र में शिक्षा, शोध, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण योजनाओं पर कार्य करना शुभ माना जाता है।
योग
धृति योग
धृति योग साहस, स्थिरता, आत्मविश्वास और सफलता प्रदान करने वाला शुभ योग माना जाता है। इस योग में किए गए धार्मिक कार्य, निवेश, शिक्षा और नए कार्यों में अच्छे परिणाम मिलने की संभावना रहती है।
करण
बालव करण
कौलव करण
दोनों करण पूजा-पाठ, दान, शिक्षा, व्यापार और सामान्य शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माने जाते हैं।
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 बजे से 12:56 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:47 बजे से 03:42 बजे तक
अमृत काल: प्रातः 08:50 बजे से 10:25 बजे तक
अशुभ समय
राहुकाल: सायं 04:30 बजे से 06:00 बजे तक
यमगण्ड काल: दोपहर 12:00 बजे से 01:30 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 03:00 बजे से 04:30 बजे तक
धार्मिक महत्व
रविवार का दिन सूर्य देव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। श्रावण मास में भगवान शिव का जलाभिषेक करने के साथ भगवान श्रीगणेश और सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि, आरोग्य और सफलता प्राप्त होने की मान्यता है। इस दिन सूर्य देव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करना और श्रीगणेश को दूर्वा तथा मोदक अर्पित करना शुभ माना जाता है।
रविवार के उपाय
प्रातः स्नान के बाद सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें।
भगवान शिव का जल, दूध और बेलपत्र से अभिषेक करें।
श्रीगणेश को दूर्वा, लाल पुष्प और मोदक अर्पित करें।
"ॐ सूर्याय नमः", "ॐ गं गणपतये नमः" और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।
गेहूं, गुड़, तांबे के पात्र या लाल वस्त्र का दान करें।
जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं और बुजुर्गों का सम्मान करें।