18 जुलाई 2026 का पंचांग: जानें शनिवार की तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, नक्षत्र और आज का पंचांग
18 July 2026 Panchang: जानें 18 जुलाई 2026, शनिवार का पंचांग। पढ़ें श्रावण शुक्ल तृतीया, तिथि, नक्षत्र, योग, करण, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय-सूर्यास्त, शनिवार के उपाय और धार्मिक महत्व।
18 जुलाई 2026 का पंचांग (शनिवार)
पंचांग विवरण
दिन: शनिवार
तिथि: श्रावण शुक्ल तृतीया
पक्ष: शुक्ल पक्ष
मास: श्रावण मास
विक्रम संवत: 2083
सूर्य राशि: मिथुन
चंद्र राशि: सिंह
ऋतु: वर्षा ऋतु
सूर्योदय: प्रातः 05:39 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:40 बजे
तिथि
श्रावण शुक्ल तृतीया
तृतीया तिथि को शुभ कार्यों, धन संबंधी योजनाओं, खरीदारी, शिक्षा, यात्रा और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रावण मास में इस तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सुख, समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है।
नक्षत्र
आर्द्रा नक्षत्र
आर्द्रा नक्षत्र परिवर्तन, ज्ञान, अनुसंधान और नए अवसरों का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र में धैर्य और विवेक के साथ किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना रहती है।
योग
वज्र योग
वज्र योग में महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि पूजा-पाठ, जप, तप, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए यह समय शुभ माना जाता है।
करण
गर करण
वणिज करण
ये दोनों करण व्यापार, शिक्षा, यात्रा, निवेश और सामान्य शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माने जाते हैं।
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:02 बजे से 12:54 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:45 बजे से 03:41 बजे तक
अमृत काल: प्रातः 09:10 बजे से 10:45 बजे तक
अशुभ समय
राहुकाल: प्रातः 09:00 बजे से 10:30 बजे तक
यमगण्ड काल: दोपहर 01:30 बजे से 03:00 बजे तक
गुलिक काल: प्रातः 06:00 बजे से 07:30 बजे तक
धार्मिक महत्व
शनिवार के दिन श्रावण मास में भगवान शिव और शनि देव की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पित करना, महामृत्युंजय मंत्र तथा "ॐ नमः शिवाय" का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। शनि देव को तिल के तेल का दीपक अर्पित करने और जरूरतमंदों को काले तिल, उड़द या वस्त्र का दान करने से शनि की कृपा प्राप्त होती है।
शनिवार के उपाय
भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें।
शिवलिंग पर बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें।
शनि देव को सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
"ॐ नमः शिवाय" और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का जाप करें।
काले तिल, उड़द की दाल, कंबल या लोहे की वस्तुओं का दान करें।
पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाकर परिक्रमा करें।