17 जुलाई 2026 का पंचांग (शुक्रवार)

पंचांग विवरण

दिन: शुक्रवार

तिथि: श्रावण शुक्ल द्वितीया

पक्ष: शुक्ल पक्ष

मास: श्रावण मास

विक्रम संवत: 2083

सूर्य राशि: मिथुन

चंद्र राशि: कर्क

ऋतु: वर्षा ऋतु

सूर्योदय: प्रातः 05:38 बजे

सूर्यास्त: सायं 07:40 बजे

तिथि

श्रावण शुक्ल द्वितीया

द्वितीया तिथि को शुभ कार्यों, यात्रा, शिक्षा, नए कार्यों की शुरुआत और पारिवारिक मांगलिक कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है। श्रावण मास में इस तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन में खुशहाली आने की मान्यता है।

नक्षत्र

मृगशिरा नक्षत्र

मृगशिरा नक्षत्र ज्ञान, शिक्षा, यात्रा, व्यापार और नई योजनाओं की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र में किए गए कार्यों में सफलता और प्रगति के योग बनते हैं।

योग

हर्षण योग

हर्षण योग शुभ और मंगलकारी योग माना जाता है। इस योग में किए गए धार्मिक कार्य, व्यापार, निवेश, शिक्षा और नए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना रहती है। यह योग मानसिक प्रसन्नता और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करता है।

करण

कौलव करण

तैतिल करण

दोनों करण सामान्य शुभ कार्यों, व्यापार, शिक्षा, यात्रा, विवाह संबंधी चर्चा और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अनुकूल माने जाते हैं।

शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:02 बजे से 12:54 बजे तक

विजय मुहूर्त: दोपहर 02:45 बजे से 03:41 बजे तक

अमृत काल: प्रातः 08:50 बजे से 10:25 बजे तक

अशुभ समय

राहुकाल: प्रातः 10:30 बजे से 12:00 बजे तक

यमगण्ड काल: दोपहर 03:00 बजे से 04:30 बजे तक

गुलिक काल: प्रातः 07:30 बजे से 09:00 बजे तक

धार्मिक महत्व

शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष शुभ माना जाता है। श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना करने से भी विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन माता लक्ष्मी को कमल का पुष्प, खीर और सफेद मिठाई अर्पित करें। भगवान शिव का जलाभिषेक कर बेलपत्र अर्पित करें तथा "ॐ नमः शिवाय" और "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" मंत्रों का जाप करें। इससे धन, सुख-समृद्धि और पारिवारिक खुशहाली की प्राप्ति होती है।

शुक्रवार के उपाय

माता लक्ष्मी को कमल का पुष्प और सफेद मिठाई अर्पित करें।

भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें।

"ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें।

सफेद वस्त्र, चावल, दूध या खीर का दान करें।

जरूरतमंदों को भोजन कराएं और कन्याओं का आशीर्वाद लें।

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