16 जून 2026 पंचांग: आषाढ़ अमावस्या, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, नक्षत्र, हनुमान पूजा और पितृ तर्पण का महत्व
16 जून 2026 का आज का पंचांग पढ़ें। जानें आषाढ़ अमावस्या तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, नक्षत्र, योग, करण, हनुमान पूजा विधि, पितृ तर्पण का महत्व और मंगलवार के विशेष उपाय।
आज का पंचांग – 16 जून 2026 (मंगलवार)
16 जून 2026 पंचांग
16 जून 2026, मंगलवार का दिन भगवान हनुमान और मंगल देव को समर्पित है। यह दिन साहस, शक्ति, पराक्रम, आत्मविश्वास और शत्रुओं पर विजय का प्रतीक माना जाता है। हनुमान जी की पूजा करने से भय, संकट और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं।
पंचांग विवरण
दिन: मंगलवार
मास: आषाढ़
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: अमावस्या
विक्रम संवत: 2083
ऋतु: ग्रीष्म ऋतु
सूर्य राशि: वृषभ
चंद्र राशि: वृषभ
सूर्योदय: प्रातः 05:25 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:38 बजे
तिथि
आषाढ़ अमावस्या
अमावस्या तिथि पितरों के तर्पण, दान-पुण्य, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन पितरों के निमित्त किए गए कार्य विशेष फल प्रदान करते हैं।
नक्षत्र
कृत्तिका नक्षत्र
कृत्तिका नक्षत्र अग्नि तत्व से संबंधित माना जाता है। यह नक्षत्र साहस, नेतृत्व, आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय का प्रतीक है। इस नक्षत्र में किए गए कार्यों में सफलता के लिए परिश्रम आवश्यक होता है।
योग
गण्ड योग
गण्ड योग में महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय सावधानी रखने की सलाह दी जाती है। धैर्य और विवेक के साथ किए गए कार्यों में सफलता प्राप्त हो सकती है।
करण
नाग करण
किंस्तुघ्न करण
अमावस्या के दिन इन करणों का विशेष महत्व माना जाता है।
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त
11:54 AM – 12:44 PM
विजय मुहूर्त
02:35 PM – 03:31 PM
अमृत काल
08:40 AM – 10:15 AM
अशुभ समय
राहुकाल
03:00 PM – 04:30 PM
यमगण्ड काल
09:00 AM – 10:30 AM
गुलिक काल
12:00 PM – 01:30 PM
इन समयों में नए और मांगलिक कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए।
धार्मिक महत्व
अमावस्या पर पितरों का तर्पण और श्राद्ध कर्म करना शुभ माना जाता है।
हनुमान जी की पूजा और सुंदरकांड का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ लाभकारी माना जाता है।
मंगलवार के उपाय
हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें।
हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करें।
लाल मसूर दाल या गुड़ का दान करें।
बंदरों को केला या चना खिलाएं।
पितरों के निमित्त तर्पण और दान करें।
आज का दिन साहस, आत्मबल, आध्यात्मिक साधना और पितृ कार्यों के लिए विशेष महत्व रखता है। धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना है।