13 जुलाई 2026 का पंचांग: सोमवार, प्रदोष व्रत, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, तिथि और नक्षत्र
13 जुलाई 2026 का पंचांग: जानें सोमवार का शुभ मुहूर्त, राहुकाल, आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी, प्रदोष व्रत, अश्विनी और भरणी नक्षत्र, गण्ड योग, करण, सूर्योदय-सूर्यास्त का समय, भगवान शिव की पूजा विधि, धार्मिक महत्व और सोमवार के प्रभावी उपाय।
13 जुलाई 2026 का पंचांग (सोमवार)
पंचांग विवरण
दिन: सोमवार
तिथि: आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी
पक्ष: कृष्ण पक्ष
मास: आषाढ़
विक्रम संवत: 2083
सूर्य राशि: मिथुन
चंद्र राशि: मेष
ऋतु: वर्षा ऋतु
सूर्योदय: प्रातः 05:36 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:42 बजे
तिथि
आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी (प्रदोष व्रत)
त्रयोदशी तिथि भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। सोमवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख, समृद्धि तथा आरोग्य की प्राप्ति होती है।
नक्षत्र
अश्विनी नक्षत्र (अधिकांश समय)
इसके बाद भरणी नक्षत्र का आरंभ होगा।
अश्विनी नक्षत्र नए कार्यों की शुरुआत, स्वास्थ्य लाभ, यात्रा और उन्नति के लिए शुभ माना जाता है। भरणी नक्षत्र साहस, जिम्मेदारी और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है।
योग
गण्ड योग
गण्ड योग में महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि भगवान शिव की आराधना, जप, ध्यान, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए यह समय शुभ माना जाता है।
करण
तैतिल करण
गर करण
दोनों करण व्यापार, शिक्षा, यात्रा, पूजा-पाठ और सामान्य शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माने जाते हैं।
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: 12:02 PM से 12:53 PM तक
विजय मुहूर्त: 02:45 PM से 03:41 PM तक
अमृत काल: 09:05 AM से 10:40 AM तक
अशुभ समय
राहुकाल: 07:30 AM से 09:00 AM तक
यमगण्ड काल: 10:30 AM से 12:00 PM तक
गुलिक काल: 01:30 PM से 03:00 PM तक
धार्मिक महत्व
सोमवार और प्रदोष व्रत का संयोग भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन शिवलिंग का जल, दूध, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और भांग से अभिषेक करने तथा "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। संध्या के समय प्रदोष काल में शिव पूजा का विशेष महत्व है।
सोमवार के उपाय
भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और सफेद पुष्प अर्पित करें।
"ॐ नमः शिवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें।
महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें।
जरूरतमंदों को दूध, चावल, सफेद वस्त्र या फल का दान करें।
प्रदोष काल में शिव मंदिर में दीपक जलाएं।