11 जुलाई 2026 का पंचांग (शनिवार)

पंचांग विवरण

दिन: शनिवार

तिथि: आषाढ़ कृष्ण एकादशी

पक्ष: कृष्ण पक्ष

मास: आषाढ़

विक्रम संवत: 2083

सूर्य राशि: मिथुन

चंद्र राशि: मीन (रात्रि में मेष राशि में प्रवेश)

ऋतु: वर्षा ऋतु

सूर्योदय: प्रातः 05:35 बजे

सूर्यास्त: सायं 07:42 बजे

तिथि

आषाढ़ कृष्ण एकादशी (योगिनी एकादशी)

आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी व्रत मानी जाती है। इस दिन व्रत, जप, तप और भगवान विष्णु की आराधना करने से समस्त पापों का नाश होता है तथा सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। एकादशी व्रत का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है।

नक्षत्र

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र (प्रातः तक)

इसके बाद रेवती नक्षत्र का आरंभ होगा।

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र धैर्य, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है, जबकि रेवती नक्षत्र यात्रा, शुभ कार्यों, व्यापार, शिक्षा और नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

योग

धृति योग

धृति योग साहस, धैर्य और सफलता प्रदान करने वाला शुभ योग माना जाता है। इस योग में किए गए धार्मिक कार्य, शिक्षा, व्यापार और निवेश से जुड़े कार्यों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना रहती है।

करण

विष्टि (भद्रा) करण

बव करण

भद्रा काल में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों से बचना उचित माना जाता है। हालांकि पूजा-पाठ, जप, तप और आध्यात्मिक साधना करना शुभ रहता है।

शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: 12:01 PM से 12:53 PM तक

विजय मुहूर्त: 02:45 PM से 03:41 PM तक

अमृत काल: 09:20 AM से 10:55 AM तक

अशुभ समय

राहुकाल: 09:00 AM से 10:30 AM तक

यमगण्ड काल: 01:30 PM से 03:00 PM तक

गुलिक काल: 06:00 AM से 07:30 AM तक

धार्मिक महत्व

शनिवार के दिन शनि देव की पूजा के साथ योगिनी एकादशी का व्रत रखने का विशेष महत्व है। भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। शनि देव को तिल के तेल का दीपक अर्पित करने और जरूरतमंदों को अन्न एवं वस्त्र दान करने से भी विशेष पुण्य मिलता है।

शनिवार के उपाय

भगवान विष्णु की पूजा कर तुलसी दल अर्पित करें।

"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें।

शनि देव को सरसों या तिल के तेल का दीपक अर्पित करें।

काले तिल, उड़द की दाल, छाता या जूते का दान करें।

पीपल के वृक्ष की परिक्रमा कर दीपक जलाएं।

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