10 जुलाई 2026 का पंचांग: जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल, तिथि, नक्षत्र, योग और शुक्रवार के उपाय
10 जुलाई 2026 का पंचांग पढ़ें। जानें आषाढ़ कृष्ण दशमी तिथि, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, सुकर्मा योग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय-सूर्यास्त, धार्मिक महत्व और शुक्रवार के उपाय।
10 जुलाई 2026 का पंचांग (शुक्रवार)
पंचांग विवरण
दिन: शुक्रवार
तिथि: आषाढ़ कृष्ण दशमी
पक्ष: कृष्ण पक्ष
मास: आषाढ़
विक्रम संवत: 2083
सूर्य राशि: मिथुन
चंद्र राशि: मीन
ऋतु: वर्षा ऋतु
सूर्योदय: प्रातः 05:35 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:42 बजे
तिथि
आषाढ़ कृष्ण दशमी
दशमी तिथि धर्म-कर्म, दान-पुण्य, आध्यात्मिक साधना और शुभ कार्यों के लिए उत्तम मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि, यश और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक अनुष्ठान, जप और सत्संग का विशेष महत्व रहता है।
नक्षत्र
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र धैर्य, ज्ञान, आध्यात्मिक उन्नति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र में किए गए कार्य दीर्घकाल तक शुभ फल देने वाले माने जाते हैं। शिक्षा, शोध, निवेश और धार्मिक कार्यों के लिए यह नक्षत्र अनुकूल माना जाता है।
योग
सुकर्मा योग
सुकर्मा योग अत्यंत शुभ योगों में से एक माना जाता है। इस योग में नए कार्यों की शुरुआत, व्यापार, निवेश, शिक्षा, विवाह संबंधी चर्चा और धार्मिक कार्य करना लाभदायक माना जाता है। परिश्रम का उत्तम फल मिलने की संभावना रहती है।
करण
गर करण
वणिज करण
दोनों करण व्यापार, यात्रा, शिक्षा, खरीदारी, निवेश और सामान्य शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माने जाते हैं।
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: 12:01 PM से 12:53 PM तक
विजय मुहूर्त: 02:44 PM से 03:41 PM तक
अमृत काल: 08:45 AM से 10:20 AM तक
अशुभ समय
राहुकाल: 10:30 AM से 12:00 PM तक
यमगण्ड काल: 03:00 PM से 04:30 PM तक
गुलिक काल: 07:30 AM से 09:00 AM तक
धार्मिक महत्व
शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी और संतोषी माता की पूजा के लिए विशेष शुभ माना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी को कमल का पुष्प, खीर और सफेद मिठाई अर्पित करने से धन, वैभव और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। दशमी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र तथा धन का दान करना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
शुक्रवार के उपाय
माता लक्ष्मी को कमल का पुष्प और खीर अर्पित करें।
"ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें।
भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें।
सफेद वस्त्र, चावल, दूध या मिठाई का दान करें।
कन्याओं और जरूरतमंदों को भोजन कराएं तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।