1 अगस्त 2026 का पंचांग: जानें शुभ मुहूर्त, तिथि, नक्षत्र, योग, राहुकाल और शनिवार के उपाय

1 August 2026 Panchang: जानें 1 अगस्त 2026 का पंचांग, सूर्योदय-सूर्यास्त, तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल, शुभ मुहूर्त, शनिवार के उपाय और धार्मिक महत्व।

Published On 2026-07-30 17:30 GMT   |   Update On 2026-07-30 17:30 GMT

1 अगस्त 2026 का पंचांग (शनिवार)

पंचांग विवरण

दिन: शनिवार

तिथि: श्रावण कृष्ण तृतीया

पक्ष: कृष्ण पक्ष

मास: श्रावण मास

विक्रम संवत: 2083

सूर्य राशि: कर्क

चंद्र राशि: कुंभ

ऋतु: वर्षा ऋतु

सूर्योदय: प्रातः 05:46 बजे

सूर्यास्त: सायं 07:32 बजे

तिथि

श्रावण कृष्ण तृतीया

तृतीया तिथि को शुभ कार्यों, धार्मिक अनुष्ठानों, दान-पुण्य, शिक्षा और नई योजनाओं की शुरुआत के लिए उत्तम माना जाता है। श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है।

नक्षत्र

धनिष्ठा नक्षत्र

धनिष्ठा नक्षत्र धन, समृद्धि, सफलता, नेतृत्व और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र में व्यापार, निवेश, शिक्षा और नए कार्यों की शुरुआत शुभ मानी जाती है।

योग

सुकर्मा योग

सुकर्मा योग अत्यंत शुभ योगों में से एक माना जाता है। इस योग में किए गए धार्मिक कार्य, व्यापार, निवेश, शिक्षा और मांगलिक कार्यों में सफलता मिलने की संभावना रहती है।

करण

विष्टि (भद्रा) करण

बव करण

भद्रा काल में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। भद्रा समाप्त होने के बाद शुभ कार्य किए जा सकते हैं। पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए समय अनुकूल रहेगा।

शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 बजे से 12:56 बजे तक

विजय मुहूर्त: दोपहर 02:47 बजे से 03:43 बजे तक

अमृत काल: प्रातः 09:05 बजे से 10:40 बजे तक

अशुभ समय

राहुकाल: प्रातः 09:00 बजे से 10:30 बजे तक

यमगण्ड काल: दोपहर 01:30 बजे से 03:00 बजे तक

गुलिक काल: प्रातः 06:00 बजे से 07:30 बजे तक

धार्मिक महत्व

शनिवार का दिन भगवान शनि देव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। श्रावण मास में भगवान शिव और शनि देव की आराधना करने से ग्रह दोषों में कमी आती है और जीवन की बाधाएं दूर होने की मान्यता है। इस दिन शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करना तथा शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

शनिवार के उपाय

भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें।

शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करें।

पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

"ॐ नमः शिवाय" और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें।

काले तिल, उड़द की दाल, काले वस्त्र या लोहे की वस्तु का दान करें।

जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं।

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