स्कंद षष्ठी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और भगवान कार्तिकेय व्रत का महत्व
स्कंद षष्ठी 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व जानें। यह व्रत भगवान कार्तिकेय को समर्पित होता है, जिसे संतान सुख, साहस, सफलता और शत्रुओं पर विजय प्राप्ति के लिए विशेष रूप से किया जाता है। जानें 24 मार्च 2026 को पड़ने वाली स्कंद षष्ठी का सही समय, व्रत रखने की विधि, पूजा सामग्री और इस दिन किए जाने वाले उपाय, जिससे जीवन की बाधाएं दूर होकर सुख-समृद्धि और शांति प्राप्त हो सके।
स्कंद षष्ठी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
स्कंद षष्ठी भगवान कार्तिकेय (स्कंद/मुरुगन) को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है और विशेष रूप से संतान सुख, साहस और सफलता के लिए रखा जाता है। इस दिन भक्त विधि-विधान से भगवान कार्तिकेय की पूजा करते हैं और व्रत रखकर उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। आइए जानते हैं मार्च महीने में स्कंद षष्ठी का व्रत कब रखा जाएगा। साथ ही, जानिए इसकी पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व के बारे में।
स्कंद षष्ठी व्रत तिथि और मुहूर्त
चैत्र माह में स्कंद षष्ठी का व्रत शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को रखा जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल यह तिथि 23 मार्च की शाम 6 बजकर 38 मिनट से शुरू होकर 24 मार्च को शाम 4 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। हिंदू पंचांग के अनुसार व्रत और त्योहारों में उदया तिथि का विशेष महत्व होता है। इसलिए इस बार स्कंद षष्ठी का व्रत 24 मार्च 2026 को रखा जाएगा। इस दिन भक्त भगवान कार्तिकेय की पूजा कर व्रत रखेंगे और उनके आशीर्वाद की कामना करेंगे।
स्कंद षष्ठी व्रत की पूजा विधि
स्कंद षष्ठी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करके वहां भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा स्थापित करें। साथ ही शिव परिवार – भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी का भी ध्यान करें। पूजा के दौरान भगवान को फूल, फल, धूप और दीप अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धा से भोग लगाएं और आरती करें। मान्यता है कि इस प्रकार विधि-विधान से पूजा करने पर भगवान कार्तिकेय की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
स्कंद षष्ठी का महत्व
भगवान कार्तिकेय को देवताओं के सेनापति माना जाता है
यह व्रत करने से: शत्रुओं पर विजय, साहस और आत्मबल में वृद्धि ,संतान प्राप्ति का आशीर्वाद ,जीवन की बाधाओं से मुक्ति
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान स्कंद की विशेष कृपा मिलती है