चैत्र नवरात्रि 2026 Day 4: मां कूष्मांडा व्रत कथा, पूजा का महत्व और मंत्र

चैत्र नवरात्रि 2026 के चौथे दिन मां कूष्मांडा की व्रत कथा पढ़ें। जानें मां कूष्मांडा की पूरी कहानी, पूजा का महत्व, स्वरूप और शक्तिशाली मंत्र। इस दिन पूजा करने से आयु, बल, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

Published On 2026-03-21 16:42 GMT   |   Update On 2026-03-21 16:42 GMT

चैत्र नवरात्रि 2026 Day 4: मां कूष्मांडा व्रत कथा, जानें पूरी कहानी

चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। यह दिन 22 मार्च 2026 को पड़ता है। मां कूष्मांडा को सृष्टि की आदिशक्ति और ब्रह्मांड की रचयिता माना जाता है। मां कूष्मांडा की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा करने से आयु, यम, बल और आरोग्य की प्राप्ति हो सकती है। जीवन से नकारात्मकता हट जाती हैं और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। लंबे समय से चली आ रही परेशानियां दूर हो सकती हैं और हर इच्छा पूर्ण होती हैं। आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की किस कथा का पाठ करना चाहिए

मां कूष्मांडा का स्वरूप

देवी भागवत पुराण के अनुसार, मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं। इनमें से सात हाथों में वे कमंडल, धनुष-बाण, कमल-पुष्प, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा धारण किए हुए हैं, जबकि आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को प्रदान करने वाली जपमाला सुशोभित रहती है।

मां कूष्मांडा व्रत कथा ( Maa Kushmanda Vrat Katha)

एक पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब सृष्टि का अस्तित्व तक नहीं था और चारों ओर घोर अंधकार व्याप्त था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य शक्ति और मंद मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण इन्हें सृष्टि की आदि-स्वरूपा और आदिशक्ति कहा जाता है। उनका निवास स्थान सूर्यमंडल के मध्य लोक में माना गया है। यहां निवास करने की क्षमता और सामर्थ्य केवल मां कूष्मांडा में ही है। मां कूष्मांडा का तेज और कांति स्वयं सूर्य के समान दैदीप्यमान है। उनकी आभा से समस्त लोक प्रकाशित हो जाते हैं। मान्यता है कि मां कूष्मांडा की उपासना करने से भक्तों के समस्त रोग-शोक, कष्ट और दुख दूर हो जाते हैं। साथ ही जीवन में आयु, यश, बल, आरोग्य और समृद्धि की वृद्धि होती है।

मां कूष्मांडा की पूजा का महत्व

जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और बुद्धि बढ़ती है

रोग, शोक और कष्ट दूर होते हैं

आयु, यश और बल की प्राप्ति होती है

मां कूष्मांडा के मंत्र ( Maa Kushmanda Mantra)

देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

बीज मंत्र – कुष्मांडा: ऐं ह्री देव्यै नम: पूजा मंत्र – ऊं कुष्माण्डायै नम: ध्यान मंत्र – वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्। सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्

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