रंग पंचमी 2026: कब है, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और कुंज बिहारी की आरती

Rang Panchami 2026 Date: होली के बाद मनाया जाने वाला रंगों का खास पर्व रंग पंचमी 8 मार्च 2026 (रविवार) को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को आता है और इसे होली उत्सव का अंतिम दिन भी माना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा की जाती है और मंदिरों में विशेष रंगोत्सव आयोजित होता है। मान्यता है कि रंग पंचमी पर श्रद्धा से पूजा करने और गुलाल से उत्सव मनाने से जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। जानें रंग पंचमी

Published On 2026-03-08 15:36 GMT   |   Update On 2026-03-08 15:36 GMT

रंग पंचमी 2026: कब है, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और “कुंज बिहारी की आरती”

Rang Panchami 2026: होली के बाद आने वाला रंगों का यह खास त्योहार रंग पंचमी कहलाता है। यह पर्व खास तौर पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की रंग-लीला से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस दिन लोग गुलाल से रंग खेलते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार रंग पंचमी हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है और इसे होली उत्सव का अंतिम दिन भी माना जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को रंग पंचमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। रंग पंचमी के साथ ब्रज क्षेत्र में चलने वाला लगभग 40 दिनों का होली उत्सव भी समाप्त हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवी-देवता स्वयं पृथ्वी पर आकर भक्तों के साथ रंगों का उत्सव मनाते हैं। मान्यता है कि इस दिन रंग खेलने और उत्सव मनाने से देवता प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि तथा खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। रंग पंचमी को देवताओं को समर्पित पर्व माना जाता है, इसलिए इसे देव पंचमी या श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। रंग पंचमी पर राधा-कृष्ण और लक्ष्मी जी की पूजा करने का विधान है। इस साल रंग पंचमी का पर्व 8 मार्च को धूमधाम से मनाया जा रहा है। आइए जानते हैं रंग पंचमी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, आरती और मंत्र

रंग पंचमी 2026 कब है?

तारीख: 8 मार्च 2026 (रविवार)

पंचमी तिथि शुरू: 7 मार्च 2026, शाम 7:17 बजे ,पंचमी तिथि समाप्त: 8 मार्च 2026, रात 9:10 बजे, उदयातिथि के अनुसार 8 मार्च 2026 को रंग पंचमी मनाई जाएगी।

रंग पंचमी 2026 पूजा विधि (Rang Panchami 2026 Puja Vidhi)

रंग पंचमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण, राधारानी और मां लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। प्रातःकाल या फिर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर दैनिक कार्यों से निवृत्त हो जाएं और स्नान करें। इसके बाद स्वच्छ और पवित्र वस्त्र धारण करें। सबसे पहले एक लकड़ी की चौकी लें और उस पर पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाएं। फिर उस चौकी पर राधा-कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद पास में एक कलश की स्थापना करें। कलश पर स्वास्तिक का चिह्न बनाएं और उसमें स्वच्छ जल भरें। फिर कलश के ऊपर थोड़ा सा अनाज रखकर उसे विधि अनुसार ढक दें।

रंग पंचमी का महत्व

रंग पंचमी को कई जगह देव पंचमी या कृष्ण पंचमी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राधा और गोपियों के साथ रंग खेला था।

इस दिन रंग खेलने और पूजा करने से: नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है ,घर में सुख-समृद्धि आती है ,भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है ,कई शहरों जैसे उज्जैन, इंदौर, मथुरा और वृंदावन में इस दिन भव्य जुलूस और रंगोत्सव आयोजित किए जाते हैं।

रंग पंचमी पर करें इन मंत्रों का जाप (Rang Panchami 2026 Mantra)

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः ॐ श्री कृष्णाय नमः राधा-कृष्ण मंत्र: “ॐ ऐं ह्रीं श्रीं नमो भगवते राधाप्रियाय राधारमणाय गोपीजनवल्लभाय ममाभीष्टं पूरय पूरय हुं फट् स्वाहा” प्रार्थना मंत्र: “देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पते! देहिमे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:” लक्ष्मी नारायण मंत्र: “ॐ श्री लक्ष्मी-नारायणाय नमः

रंग पंचमी पर करें कुंज बिहारी की ये आरती

श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ।

कुन्जबिहारी तेरी आरती गाऊँ।

श्री श्यामसुन्दर तेरी आरती गाऊँ।

श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥

मोर मुकुट प्रभु शीश पे सोहे।

प्यारी बंशी मेरो मन मोहे।

देखि छवि बलिहारी जाऊँ।

श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥

चरणों से निकली गंगा प्यारी।

जिसने सारी दुनिया तारी।

मैं उन चरणों के दर्शन पाऊँ।

श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥

दास अनाथ के नाथ आप हो।

दुःख सुख जीवन प्यारे साथ हो।

हरि चरणों में शीश नवाऊँ।

श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥

श्री हरि दास के प्यारे तुम हो।

मेरे मोहन जीवन धन हो।

देखि युगल छवि बलि-बलि जाऊँ।

श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥

आरती गाऊँ प्यारे तुमको रिझाऊँ।

हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ।

श्री श्यामसुन्दर तेरी आरती गाऊँ।

श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ॥

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