Ram Navami 2026: कब है राम नवमी, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Ram Navami 2026: जानें 26 मार्च 2026 को मनाई जाने वाली राम नवमी की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त (मध्याह्न काल), पूजा विधि और इस पर्व का धार्मिक महत्व।

Published On 2026-03-17 18:08 GMT   |   Update On 2026-03-17 18:08 GMT

राम नवमी 2026: कब है, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

राम नवमी हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है, जो भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह दिन चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन (नवमी तिथि) पर आता है और बेहद शुभ माना जाता है।शास्त्रों के मुताबिक त्रेता युग में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की को अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ था। तभी से इस तिथि पर देशभर में राम नवमी का पर्व मनाने की परंपरा चली आ रही है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी माना जाता है। वहीं इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस साल राम नवमी का पर्व 26 मार्च को मनाया जाएगा। वहीं इस दिन रवि और सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। आइए जानते हैं तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

राम नवमी तिथि 2026 (Ram Navmi Kab Hai)

फ्यूचर पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का आरंभ 26 मार्च 2026 को सुबह 11 बजकर 46 मिनट पर होगा। वहीं इस तिथि का अंत 27 मार्च 2026 को सुबह 10 बजकर बजकर 7 मिनट पर होगा। रामायण के अनुसार भगवान राम का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था। इसलिए वर्ष 2026 में 26 मार्च 2026 को राम नवमी का पर्व मनाना शुभ रहेगा। वहीं जो लोग उदयातिथि के आधार पर पर्व मनाते हैं, वे 27 मार्च 2026 को भी राम नवमी मना सकते हैं।

तिथि और शुभ मुहूर्त

नवमी तिथि शुरू: 26 मार्च 2026 सुबह 11:48 बजे

नवमी तिथि समाप्त: 27 मार्च 2026 सुबह 10:06 बजे

राम नवमी पूजा मुहूर्त (मध्याह्न काल)

सुबह 11:13 बजे से दोपहर 1:41 बजे तक

यही समय भगवान राम के जन्म का माना जाता है, इसलिए इसी दौरान पूजा करना सबसे शुभ होता है

राम नवमी का धार्मिक महत्व

राम नवमी का दिन भगवान श्रीराम के अवतरण का प्रतीक है, जो धर्म, सत्य और मर्यादा के आदर्श माने जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने त्रेता युग में राक्षसों के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए श्रीराम के रूप में अवतार लिया था।

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