Gudi Padwa 2026: कब है गुड़ी पड़वा, जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Gudi Padwa 2026: जानें गुड़ी पड़वा 2026 कब है। इस साल 19 मार्च 2026 को हिंदू नववर्ष की शुरुआत गुड़ी पड़वा से होगी। यहां पढ़ें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस पर्व का धार्मिक महत्व।

Published On 2026-03-16 17:02 GMT   |   Update On 2026-03-16 17:02 GMT

गुड़ी पड़वा 2026: कब है, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

गुड़ी पड़वा हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे खासकर महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यह दिन हिंदू नववर्ष (शालिवाहन शक संवत) की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन से चैत्र मास की शुरुआत होती है और लोग अपने घरों में गुड़ी स्थापित कर भगवान से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। साल 2026 में गुड़ी पड़वा की तिथि को लेकर कई लोगों के मन में भ्रम है कि यह पर्व 19 मार्च को मनाया जाएगा या 20 मार्च को। तो आइए जानते हैं गुड़ी पड़वा की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और इसकी विधि।

कब है गुड़ी पड़वा 2026?

द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया जाता है। प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर होगी और इसका समापन 20 मार्च 2026 को सुबह 4 बजकर 52 मिनट पर होगा। हिंदू धर्म में किसी भी पर्व को मनाने के लिए उदयातिथि का विशेष महत्व होता है। ऐसे में प्रतिपदा तिथि का उदय 19 मार्च को होने के कारण इसी दिन गुड़ी पड़वा का त्योहार मनाया जाएगा। इसी दिन से चैत्र मास और हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत हो रही है।

गुड़ी पड़वा 2026 का शुभ मुहूर्त

गुड़ी पड़वा के दिन पूजा-पाठ और शुभ कार्य करने के लिए कुछ विशेष मुहूर्त भी बताए गए हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:51 बजे से 5:39 बजे तक रहेगा, जो पूजा और ध्यान के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 बजे से 3:18 बजे तक रहेगा। वहीं गोधूलि मुहूर्त शाम 6:29 बजे से 6:53 बजे तक रहेगा, जो विशेष रूप से शुभ कार्यों के लिए अच्छा समय माना जाता है। इसके साथ ही निशिता मुहूर्त रात 12:05 बजे से 12:52 बजे तक रहेगा।

गुड़ी पड़वा की पूजा विधि

सुबह स्नान करके घर की साफ-सफाई करें।

घर के मुख्य द्वार पर बांस की लकड़ी पर रंगीन कपड़ा, नीम के पत्ते, फूल और कलश लगाकर गुड़ी स्थापित करें।

गुड़ी की पूजा करें और भगवान विष्णु या ब्रह्मा का ध्यान करें।

परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें और नए वर्ष की शुरुआत करें।

गुड़ी पड़वा का महत्व

यह दिन हिंदू नववर्ष की शुरुआत माना जाता है।

मान्यता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना शुरू की थी।

यह पर्व नई शुरुआत, समृद्धि और सफलता का प्रतीक है।

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