मासिक शिवरात्रि 2026: करें श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ, यहां पढ़ें लिरिक्स

मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा-आराधना का विशेष महत्व होता है। इस दिन श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस स्तोत्र का श्रद्धा से पाठ करने पर भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि तथा शत्रुओं पर विजय का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए अलग-अलग मंत्रों और स्तोत्रों का पाठ करते हैं। इन्हीं में श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि के दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ रुद्राष्टकम का पाठ करने से भगवान महादेव जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों के कष्ट दूर करते हैं। कहा जाता है कि इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से मन को शांति मिलती है, नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है। इसलिए मासिक शिवरात्रि व्रत के दिन शिव पूजा के साथ श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है

श्री शिव रुद्राष्टकम स्तोत्र

नमामीशमीशान निर्वाण रूपं

विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्।

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं

चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम्॥

निराकारमोंकारमूलं तुरीयं

गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम्।

करालं महाकाल कालं कृपालं

गुणागार संसारपारं नतोऽहम्॥

तुषाराद्रि संकाश गौरं गंभीरं

मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम्।

स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा

लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥

चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं

प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्।

मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं

प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि॥

रुद्राष्टकम पाठ का महत्व

यह स्तोत्र भगवान शिव की महिमा का वर्णन करता है।

श्रद्धा से इसका पाठ करने पर शत्रुओं से रक्षा और मानसिक शक्ति बढ़ने की मान्यता है।

नियमित जप से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त हो सकती है।

कब करें रुद्राष्टकम का पाठ

मासिक शिवरात्रि के दिन

सुबह स्नान के बाद या रात में शिव पूजा के समय

शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करने के बाद

ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया स्तोत्र पाठ भगवान शिव को जल्दी प्रसन्न करता है।

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