परशुराम जयंती 2026: सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और आरती

परशुराम जयंती 2026 कब है? जानें सही तिथि (19 अप्रैल), पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र और आरती। इस दिन भगवान परशुराम की पूजा से मिलता है अक्षय पुण्य।

Published On 2026-04-18 16:50 GMT   |   Update On 2026-04-18 16:50 GMT

परशुराम जयंती 2026: सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और आरती

Parshuram Jayanti 2026: भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम की जयंती हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि (अक्षय तृतीया) को मनाई जाती है। यह दिन धर्म, साहस और न्याय का प्रतीक माना जाता है।

परशुराम जयंती 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार—

तिथि: 19 अप्रैल 2026 (रविवार)

तृतीया तिथि प्रारंभ: 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49 बजे

तिथि समाप्त: 20 अप्रैल 2026, सुबह 07:27 बजे

भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल (शाम) में हुआ माना जाता है, इसलिए 19 अप्रैल को ही जयंती मनाना अधिक शुभ माना जाता है।

परशुराम जंयती पूजा का शुभ मुहूर्त (Parshuram Jayanti 2026 Muhurat)

परशुराम जयंती पर पूजा के दो शुभ मुहूर्त पर रहे हैं।

पहला शुभ मुहूर्त- 19 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 29 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक

दूसरा मुहूर्त- शाम को 6 बजकर 49 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 57 मिनट तक है।

परशुराम जयंती 2026 पूजा विधि (Parshuram Jayanti 2026 Puja Vidhi)

अक्षय तृतीया के दिन सभी कामों से निवृत्त होकर प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें, फिर भगवान परशुराम की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें। इसके बाद चंदन का तिलक लगाकर अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और तुलसी अर्पित करें। भगवान को फल या मिठाई का भोग लगाएं, परशुराम स्तुति या मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें। इस दिन दान-पुण्य करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे अक्षय फल की प्राप्ति होती है।

॥ श्री परशुराम आरती ॥

ॐ जय परशुधारी,स्वामी जय परशुधारी।

सुर नर मुनिजन सेवत,श्रीपति अवतारी॥

ॐ जय परशुधारी…॥

जमदग्नी सुत नर-सिंह,मां रेणुका जाया।

मार्तण्ड भृगु वंशज,त्रिभुवन यश छाया॥

ॐ जय परशुधारी…॥

कांधे सूत्र जनेऊ,गल रुद्राक्ष माला।

चरण खड़ाऊँ शोभे,तिलक त्रिपुण्ड भाला॥

ॐ जय परशुधारी…॥

ताम्र श्याम घन केशा,शीश जटा बांधी।

सुजन हेतु ऋतु मधुमय,दुष्ट दलन आंधी॥

ॐ जय परशुधारी…॥

मुख रवि तेज विराजत,रक्त वर्ण नैना।

दीन-हीन गो विप्रन,रक्षक दिन रैना॥

ॐ जय परशुधारी…॥

कर शोभित बर परशु,निगमागम ज्ञाता।

कंध चाप-शर वैष्णव,ब्राह्मण कुल त्राता॥

ॐ जय परशुधारी…॥

माता पिता तुम स्वामी,मीत सखा मेरे।

मेरी बिरद संभारो,द्वार पड़ा मैं तेरे॥

ॐ जय परशुधारी…॥

अजर-अमर श्री परशुराम की,आरती जो गावे।

‘पूर्णेन्दु’ शिव साखि,सुख सम्पति पावे॥

ॐ जय परशुधारी…॥

Tags:    

Similar News