Rishi Panchami Vrat Katha 2026: ऋषि पंचमी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, जानें धार्मिक महत्व

Rishi Panchami Vrat Katha 2026: हिंदू धर्म में ऋषि पंचमी का विशेष महत्व माना गया है। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सप्तऋषियों और माता अरुंधती की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऋषि पंचमी का व्रत करने से जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए प्रायश्चित करने और मन की शुद्धि का भाव जुड़ा है।

साल 2026 में ऋषि पंचमी का व्रत 15 सितंबर, मंगलवार को रखा जाएगा। पंचमी तिथि 15 सितंबर सुबह 7:44 बजे से शुरू होकर 16 सितंबर सुबह 8:59 बजे तक रहेगी। पूजा का शुभ समय सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक बताया गया है।

ऋषि पंचमी व्रत कथा 2026

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में वरार देश में उत्तंक नाम के एक ब्राह्मण रहते थे। उनकी पत्नी सुशीला पतिव्रता और धार्मिक विचारों वाली थीं। दोनों के एक पुत्र और एक पुत्री थे।

समय आने पर ब्राह्मण ने अपनी पुत्री का विवाह अच्छे कुल में कर दिया। लेकिन दुर्भाग्य से कुछ समय बाद ही वह विधवा हो गई। बेटी के इस दुख से माता-पिता काफी परेशान हुए। इसके बाद ब्राह्मण दंपति अपनी पुत्री के साथ गंगा नदी के किनारे एक कुटिया बनाकर रहने लगे।

अचानक बेटी के शरीर पर होने लगे ऐसे बदलाव

कथा में बताया गया है कि एक दिन ब्राह्मण की पुत्री सो रही थी। अचानक उसके शरीर पर कीड़े पड़ गए। यह देखकर वह घबरा गई और उसने पूरी बात अपनी मां को बताई।

मां ने परेशान होकर अपने पति उत्तंक से इसका कारण पूछा। उत्तंक ने ध्यान के माध्यम से इस घटना का कारण जानने का प्रयास किया।

कथा के अनुसार, उन्हें पता चला कि पिछले जन्म में भी वह ब्राह्मणी थी। उससे धार्मिक नियमों से जुड़ी एक भूल हुई थी और उसने ऋषि पंचमी का व्रत नहीं किया था। इसी वजह को उसके वर्तमान कष्ट से जोड़ा गया।

ऋषि पंचमी व्रत करने की दी सलाह

उत्तंक ने अपनी पुत्री को ऋषि पंचमी का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि श्रद्धा और विधि-विधान से सप्तऋषियों का पूजन करने से उसके कष्ट दूर हो सकते हैं।

पिता की बात मानकर पुत्री ने ऋषि पंचमी का व्रत रखा और सप्तऋषियों की विधिवत पूजा की। कथा के अनुसार, व्रत के प्रभाव से उसके दुख समाप्त हो गए और अगले जन्म में उसे सुख-सौभाग्य प्राप्त हुआ।

इस कथा के माध्यम से ऋषि पंचमी व्रत की धार्मिक महत्ता बताई गई है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को अपने जाने-अनजाने में हुए कर्मों के लिए प्रायश्चित का अवसर मिलता है।

ऋषि पंचमी व्रत कथा कब पढ़नी चाहिए?

धार्मिक परंपरा के अनुसार ऋषि पंचमी के दिन पूजा करने के बाद व्रत कथा का पाठ या श्रवण किया जाता है। कथा पढ़ने के बाद सप्तऋषियों की आरती करें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करें।

कथा के अंत में भगवान और सप्तऋषियों से परिवार की सुख-शांति तथा जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा प्रार्थना करने की परंपरा भी है।

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