मोहिनी एकादशी 2026: 27 अप्रैल को कब है व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

मोहिनी एकादशी 2026 का व्रत 27 अप्रैल (सोमवार) को रखा जाएगा। यह दिन भगवान भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार को समर्पित है। जानें सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत के नियम और इस एकादशी का धार्मिक महत्व, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

Published On 2026-04-20 14:22 GMT   |   Update On 2026-04-20 14:22 GMT

मोहिनी एकादशी 2026: जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Mohini Ekadashi 2026 Date & Puja Vidhi: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे बेहद पवित्र माना जाता है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली मोहिनी एकादशी विशेष महत्व रखती है। यह व्रत भगवान भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार को समर्पित है, जिसमें उन्होंने देवताओं को अमृत प्रदान कर असुरों पर विजय दिलाई थी। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने और पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। वहीं इस साल मोहनी एकादशी का व्रत 27 अप्रैल को रखा जाएगा।

मोहिनी एकादशी 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार—

व्रत तिथि: 27 अप्रैल 2026 (सोमवार)

एकादशी तिथि प्रारंभ: 26 अप्रैल 2026 (शाम)

एकादशी तिथि समाप्त: 27 अप्रैल 2026 (रात)

उदया तिथि के अनुसार 27 अप्रैल को ही व्रत रखा जाएगा।

मोहिनी एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त

पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त: सुबह 09:02 से दोपहर 10:40 तक (शुभ चौघड़िया)

मोहिनी एकादशी व्रत के नियम

एकादशी का व्रत दशमी की रात से ही शुरू हो जाता है। इसलिए दशमी की रात को प्याज, लहसुन और भारी भोजन का त्याग करें। साथ ही मोहिनी एकादशी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए और इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इस दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए और फलाहार या निर्जल व्रत का पालन करना चाहिए। दिनभर भगवान का ध्यान, भजन-कीर्तन और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना शुभ माना जाता है। व्रती को क्रोध, झूठ और किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। अगले दिन द्वादशी तिथि पर विधिपूर्वक पारण करके व्रत पूर्ण किया जाता है।

मोहिनी एकादशी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मोहिनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति के योग बनते हैं। साथ ही यह व्रत विशेष रूप से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के लिए लाभकारी माना गया है।

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