Masik Janmashtami April 2026: मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2026: कब है तिथि, पूजा मुहूर्त, व्रत विधि, मंत्र और महत्व |
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2026 हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित होता है और भक्त इस दिन उपवास रखकर उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। साल 2026 में अप्रैल माह की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 9 अप्रैल (गुरुवार) को मनाई जाएगी। इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख-शांति, धन-समृद्धि और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत विशेष रूप से संतान सुख, पारिवारिक खुशहाली और आध्यात्मिक उन्नति के लिए लाभकारी माना जाता है।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2026: जानें तिथि, पूजा मुहूर्त, व्रत विधि और महत्व
Masik Krishna Janmashtami 2026: हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित मासिक जन्माष्टमी का विशेष महत्व होता है। यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भक्त भगवान कृष्ण की पूजा करके सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है। इसके साथ ही सुख-समृद्धि, धन-संपदा की प्राप्ति हो सकती है। ऐसे ही वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखा जा रहा है। इस बार अष्टमी तिथि दो दिन होने के कारण तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आइए जानते हैं वैशाख मास की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व, मंत्र और श्री कृष्ण जी की आरती…
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में यह व्रत हर महीने अलग-अलग तिथियों पर पड़ता है। अप्रैल महीने की मासिक जन्माष्टमी—
तिथि: 9 अप्रैल 2026 (गुरुवार)
यह व्रत कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है
पूरे साल 2026 में यह व्रत लगभग हर महीने एक बार आता है।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त (Masik Krishna Janmashtami 2026 Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4 बजकर 38 मिनट से लेकर सुबह 5 बजकर 26 मिनट तक
अमृत काल- सुबह 6 बजकर 7 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 54 मिनट
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व
यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाता है—
जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है
मानसिक तनाव और समस्याएं कम होती हैं
घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है
भक्ति और आध्यात्मिक शक्ति मजबूत होती है
यह व्रत नियमित रूप से करने से व्यक्ति का जीवन संतुलित और शांतिपूर्ण बनता है।
हर मास क्यों मनाते हैं मासिक कृष्ण जन्माष्टमी?
बता दें कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कान्हा का जन्म हुआ था। इसी के कारण देशभर में इस दिन को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। लेकिन इसके अलावा हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भी कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्री कृष्ण के जन्म की याद करने से लेकर अपने प्रभु से जुड़े रहने के कारण मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। मासिक जन्माष्टमी के दिन पूजा करने से भक्त हर महीने अपनी भक्ति से कृष्ण की कृपा प्राप्त कर सकता है।
श्री कृष्ण के शक्तिशाली मंत्र मूल मंत्र
ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नम:॥
महामंत्र (हरे कृष्ण मंत्र):हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥
बीज मंत्र:
ॐ क्लीं कृष्णाय नमः
अन्य मंत्र:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, श्री कृष्ण शरणं ममः
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर करें कृष्ण जी की आरती (Shri Krishna Aarti Lyrics)
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
गले में बैजंती माला,बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,नंद के आनंद नंदलाला।
गगन सम अंग कांति काली,राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली;भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चन्द्र सी झलक;ललित छवि श्यामा प्यारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै,देवता दरसन को तरसैं
गगन सों सुमन रासि बरसै;बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग;अतुल रति गोप कुमारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
जहां ते प्रकट भई गंगा,कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा;बसी सिव सीस, जटा के बीच,
हरै अघ कीच;चरन छवि श्रीबनवारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू,बज रही वृंदावन बेनू।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू;हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद,
कटत भव फंद;टेर सुन दीन भिखारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की,श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥