परशुराम जयंती 2026: कब है तिथि, अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

परशुराम जयंती 2026 कब है? जानें 19 अप्रैल की सही तिथि, अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व। पढ़ें भगवान परशुराम की कृपा पाने के उपाय।

Published On 2026-04-06 14:45 GMT   |   Update On 2026-04-06 14:45 GMT

परशुराम जयंती 2026: कब है तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Parshuram Jayanti 2026 Date: हिंदू धर्म में भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। उनकी जयंती हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है, जिसे अक्षय तृतीया भी कहा जाता है। साल 2026 में परशुराम जयंती एक बेहद शुभ संयोग में पड़ रही है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इनका जन्म ब्राह्मण कुल में हुआ था, लेकिन इन्होंने अन्याय और अधर्म के खिलाफ शस्त्र उठाए। परशु (फरसा) धारण करने के कारण इनका नाम “परशुराम” पड़ा। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार परशुराम जी का जन्म अक्षय तृतीया पर हुआ था। इसी दिन भक्त व्रत रखते हैं, पूजा करते हैं और भगवान परशुराम से सुख‑समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं। आइए जानते हैं इस साल कब है परशुराम जंयती…

परशुराम जंयती तिथि 2026

फ्यूचर पंचांग के अनुसार वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया का आरंभ 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर होगा। वहीं, इसका समापन 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 26 मिनट पर होगा। ऐसे में भगवान परशुराम जयंती का पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा।

शुभ मुहूर्त (पूजा का समय)

परशुराम जयंती पर पूजा के लिए सबसे शुभ समय तृतीया तिथि के दौरान दिन का समय माना जाता है।

सुबह स्नान के बाद पूजा करना श्रेष्ठ

अक्षय तृतीया होने के कारण पूरे दिन शुभ कार्य किए जा सकते हैं

पूजा विधि (Puja Vidhi)

परशुराम जयंती पर पूजा करने का आसान तरीका

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें

भगवान परशुराम और विष्णु जी की पूजा करें

फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें

विष्णु मंत्र और परशुराम स्तुति का जाप करें

जरूरतमंदों को दान दें

परशुराम जंयती का धार्मिक महत्व

परशुराम जयंती का दिन धर्म, साहस और न्याय के प्रतीक माने जाने वाले भगवान परशुराम को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन उनकी पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में अन्याय और बाधाओं का नाश होता है, आत्मबल और पराक्रम की वृद्धि होती है। वहीं भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया के दिन हुआ था। इसलिए यह तिथि अक्षय पुण्य देने वाली मानी जाती है, इसलिए इस दिन किए गए दान, जप और तप का फल कभी समाप्त नहीं होता। विशेष रूप से ब्राह्मण समाज के लिए यह पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन सभी श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु के इस अवतार की आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

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