ज्येष्ठ अमावस्या 2026 कब है? जानें स्नान-दान मुहूर्त, शनि जयंती, वट सावित्री व्रत और धार्मिक महत्व

ज्येष्ठ अमावस्या 2026 की सही तिथि, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त, शनि जयंती और वट सावित्री व्रत का संयोग, पितृ तर्पण का महत्व और धार्मिक मान्यताएं जानें। 16 मई 2026 को अमावस्या पर किए जाने वाले उपाय, पूजा विधि और शुभ समय की पूरी जानकारी पढ़ें।

Published On 2026-05-09 16:48 GMT   |   Update On 2026-05-09 16:48 GMT

ज्येष्ठ अमावस्या 2026: कब है, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त, महत्व और धार्मिक मान्यता

Jyeshtha Amavasya 2026 Date, Snan-Daan Muhurat & Significance: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या को विशेष रूप से पितरों की शांति, स्नान-दान और धार्मिक उपायों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। साल 2026 में ज्येष्ठ अमावस्या पर शनि जयंती और शनि अमावस्या का भी विशेष संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे ही ज्येष्ठ अमावस्या काफी खास होती है। इस दिन स्नान-दान करने के साथ-साथ पितरों का तर्पण, पिंडदान करना लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से पूर्वज अति प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं। इसके अलावा ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनिदेव का जन्मोत्सव के साथ-साथ वट सावित्री व्रत भी रखा जाता है। इस साल ज्येष्ठ अमावस्या तिथि दो दिन होने के कारण असमंसज की स्थिति बनी हुई है कि किस दिन स्नान-दान करना लाभकारी हो सकता है। आइए जानते हैं ज्येष्ठ अमावस्या की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, स्नान-दान का समय और धार्मिक महत्व….

ज्येष्ठ अमावस्या 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार

ज्येष्ठ अमावस्या: 16 मई 2026 (शनिवार)

अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 मई 2026 सुबह 5:11 बजे

अमावस्या तिथि समाप्त: 17 मई 2026 रात 1:30 बजे तक उदया तिथि के अनुसार 16 मई को ज्येष्ठ अमावस्या मनाई जाएगी।

ज्येष्ठ अमावस्या पर स्नान-दान का समय (Jyeshtha Amavasya 2026 Snan Daan Time)

द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करने के साथ दान करने का विधान है। 16 मई को पड़ने वाली अमावस्या को सुबह 8.55 से लेकर सुबह 10.40 तक स्नान-दान का शुभ मुहूर्त है।

ज्येष्ठ अमावस्या 2026 धार्मिक महत्व (Jyeshtha Amavasya 2026 Significance)

ज्येष्ठ अमावस्या के दिन कर्मफल दाता शनिदेव का जन्म हुआ था। इसी के कारण इस दिन को शनि जयंती के रूप में मनाते हैं। इस दिन शनिदेव की विधिवत पूजा करने के साथ कुछ ज्योतिषीय उपाय करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के दुष्प्रभाव कम हो सकते है।

ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट सावित्री व्रत भी रखा जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य के लिए व्रत रखने के साथ बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। मान्यता है कि इस दिन सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस लेकर आई थी।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने के साथ पितरों का तर्पण ककने का विशेष महत्व है। इस दिन पितरों का पिंडदान और तर्पण करने से वह प्रसन्न होते हैं और पितृदोष के दुष्प्रभाव भी कम होते हैं। इसके अलावा इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन पीपल में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और पितरों का वास होता है। ऐसे में इस दिन पीपल में जल अर्पित करने के साथ दीपक जलाएं। इससे सुख-समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है।

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