होली 2026 कब है? (3 या 4 मार्च) | होलिका दहन, चंद्र ग्रहण, सूतक काल और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी

होली 2026 की सही तारीख को लेकर लोगों में भ्रम है क्योंकि इस बार फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। जानें होली 2026 कब मनाई जाएगी — 3 मार्च या 4 मार्च? पढ़ें होलिका दहन का शुभ मुहूर्त, चंद्र ग्रहण का समय, सूतक काल और रंग वाली होली की सही तिथि। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सही निर्णय की पूरी जानकारी मिलेगी।

Published On 2026-02-28 17:45 GMT   |   Update On 2026-02-28 17:45 GMT

होली 2026: तारीख, होलिका दहन, चंद्र ग्रहण और शुभ मुहूर्त — पूरी जानकारी (3 या 4 मार्च?)

Holi 2026 Date & Celebration Details: साल 2026 में होली का त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा, लेकिन चंद्र ग्रहण की वजह से कुछ त्योहारों के समय में बदलाव और भ्रम भी पैदा हो गया है। नीचे आसान हिंदी में सभी महत्वपूर्ण तिथियाँ और शुभ समय दे रहा हूँ

होली 2026 कब है? (3 या 4 मार्च)

होली का रंगभरी उत्सव मुख्य रूप से: 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाया जाएगा। रंग खेलना, भाई-बहन का मिलन, गुलाल-पिचकारी और होली का समग्र उत्सव 4 मार्च को मनाना ज्येष्ठ ज्योतिषीय और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शुभ बताया जाता है।

कुछ पंचांग और धार्मिक परंपराओं में रंग वाली होली 3 मार्च को भी माना जाता है क्योंकि उस दिन पूर्णिमा तिथि रहती है, लेकिन चंद्र ग्रहण और सुतक काल के कारण रंग खेलना कोई भी शुभ कार्य नहीं माना जाता।

होलिका दहन 2026 कब है?

होलिका दहन: 3 मार्च 2026, मंगलवार शाम

चूंकि पूर्णिमा तिथि का दिन ही होता है, इसी दिन शाम को आग जलाकर बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक होलिका दहन किया जाता है।

शुभ समय (Muhurat):

लगभग 06:22 PM से 08:50 PM तक

यह समय प्रादोष काल और भद्र काल से बाहर होते हुए शुभ माना जाता है।

चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) कब है?

तारीख: 3 मार्च 2026 (मंगलवार)

समय: लगभग 03:20 PM से 06:47 PM के बीच

भारत में होलिका दहन वाले टाइम में अंतिम 20-30 मिनट तक ग्रहण दिखेगा जब चंद्रमा निकलता है।

सूचक काल (Sutak Kaal) ग्रहण से लगभग सुबह से शुरू माना जाता है — इस समय में शुभ कार्य टालना और धार्मिक कार्यों में सावधानी बरतना परंपरागत मान्यता है।

क्यों होली 2026 को 4 मार्च को मनाया जाता है?

धार्मिक पंचांग और पंडितों के अनुसार:

होली का मुख्य उत्सव सुबह का रंग खेलना 4 मार्च को ही शुभ माना जाता है, क्योंकि ग्रहण और सुतक काल का प्रभाव 3 मार्च को रहता है।

जबकि होलिका दहन 3 मार्च की शाम को किया जाता है, फिर अगली सुबह रंग-होली होती है।

वहीँ कुछ स्थानों/कुंडलियों में Holi के रंग 3 मार्च सुबह को भी लिए जाते हैं, लेकिन अधिकांश धार्मिक गाइडलाइन 4 मार्च को ही मुख्य Holi मानती है।

क्या महत्त्व है होली का?

होली बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।

होलिका दहन के समय होलिका कथा याद की जाती है — जहाँ भक्ति-बल से प्रह्लाद बचते हैं और बूरिक Holika जलाई जाती है।

अगली सुबह रंग खेलकर नयापन, मिलन और आनंद का उत्सव मनाया जाता है।

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