2 – 8 मार्च 2026: व्रत-त्योहार और पूजा-उत्सव की सप्ताह भर की पूरी लिस्ट (Weekly Vrat-Tyohar)

मार्च 2026 के प्रथम सप्ताह में धार्मिक गतिविधियों, व्रतों, त्योहारों और ज्योतिष-घटनाओं का एक संपूर्ण क्रम है। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के अंतिम सप्ताह में कई प्रमुख पर्व आते हैं — जैसे होलिका दहन, होली, चंद्र ग्रहण, रंग पंचमी आदि, जो भाग्य, शिक्षा, भक्ति और सामाजिक उत्सव से जुड़े हैं।

2 – 8 मार्च 2026 व्रत-त्योहार सूची

1 मार्च (रविवार) — प्रदोष व्रत

शिव व्रत का शुभ दिन, विशेष रूप से भगवान शिव और पार्वती को समर्पित पूजा का अवसर है।

2 मार्च (सोमवार) — होलिका दहन (छोटी होली)

फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है, जिससे बुराई का नाश होता है। 2026 में चंद्र ग्रहण के कारण तिथि-समय पर थोड़ा विचार करके पूजा-अनुष्ठान करना सलाह दी जाती है।

 3 मार्च (मंगलवार) — होली का मुख्य दिन

चंद्र ग्रहण 2026 – वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण इसी दिन फाल्गुन पूर्णिमा पर लग रहा है (होली के दिन ग्रहण और पवित्र तिथि का संयोग)‌।

4 मार्च (बुधवार) — बसंत उत्सव 

होली के बाद आते हुए बसंत पर्व का उत्सव आनंदपूर्वक मनाया जाता है।

 5 मार्च (गुरुवार) — भाईदूज

भाई-बहन के प्रेम और आशीर्वाद का पर्व जब बहन अपने भाई का तिलक करती है।

6 मार्च (शुक्रवार) — भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी

गणेश जी के पूजन और व्रत का शुभ दिन।

8 मार्च (रविवार) — रंगपंचमी

होली के बाद रंगों का दूसरा दिन, हरियाली, पानी-गुलाल और मिलन-समृद्धि का पर्व।

विशेष ज्योतिष-घटनाएँ

चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026

2026 का पहला चंद्र ग्रहण होली (फाल्गुन पूर्णिमा) के दिन लग रहा है, और भारत में इसका अंतिम भाग देखा जाएगा। ग्रहण का समय दोपहर से शाम तक रहेगा, जिससे ग्रहण काल (सूचक काल) का ध्यान रखना आवश्यक है।

पूजा-उत्सवों का महत्व

प्रदोष व्रत: भगवान शिव की शांति, बाधा निवारण और शुभ ऊर्जा के लिए उत्तम।

होलिका दहन-होली: बुराई पर अच्छाई की जीत और सामाजिक आनंद का प्रतीक।

भाईदूज: स्नेह, रक्षा और सम्मान का पारिवारिक पर्व।

रंगपंचमी: बसंती उमंग, स्वास्थ्य और मिलन-समृद्धि को दर्शाता है।

1 मार्च -प्रदोष व्रत

2 मार्च-होलिका दहन

3 मार्च-होली, चंद्र ग्रहण

4 मार्च-बसंत उत्सव

5 मार्च-भाईदूज

6 मार्च-भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी

8 मार्च-रंगपंचमी

Tags: