होलाष्टक 2026: कब से कब तक रहेगा, होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

Holashtak 2026 in Hindi – जानिए होलाष्टक 2026 कब से कब तक रहेगा, होलिका दहन की तिथि और शुभ मुहूर्त, होलाष्टक के दौरान क्या करें और क्या न करें। इस लेख में आपको होलाष्टक का धार्मिक महत्व, प्रह्लाद–होलिका कथा से जुड़ी मान्यताएं और होली से पहले इस पावन अवधि का आध्यात्मिक महत्व सरल भाषा में बताया गया है। होलाष्टक के आठ दिनों में पूजा-पाठ, दान-पुण्य और संयम का विशेष महत्व माना जाता है।

Published On 2026-01-30 14:59 GMT   |   Update On 2026-01-30 14:59 GMT

होलाष्टक 2026: कब से कब तक रहेगा, होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

Holashtak 2026 in Hindi हिंदू धर्म में एक विशेष धार्मिक अवधि मानी जाती है। यह समय होली से पहले के आठ दिनों का होता है, जब वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ जाती है। होलाष्टक के दौरान पूजा-पाठ, संयम और सकारात्मक सोच का विशेष महत्व बताया गया है।

इस लेख में जानिए होलाष्टक 2026 की तारीख, शुरुआत-समाप्ति, होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व।

होलाष्टक 2026 कब से कब तक रहेगा?

साल 2026 में होलाष्टक की शुरुआत 21 फरवरी (शनिवार) से होगी और

28 फरवरी 2026 (शनिवार) को इसका समापन होगा।

इस प्रकार होलाष्टक पूरे 8 दिनों तक रहेगा।

होलाष्टक की समाप्ति के अगले दिन रंगों का पर्व होली मनाया जाता है।

होलिका दहन 2026 का शुभ मुहूर्त

होलाष्टक के अंतिम दिन होलिका दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है।

होलिका दहन तिथि: 28 फरवरी 2026

शुभ समय: सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में

धार्मिक मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में होलिका दहन करने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और सुख-समृद्धि आती है।

होलाष्टक के दौरान क्या करें?

होलाष्टक के आठ दिनों में निम्न कार्य करना शुभ माना जाता है—

भगवान विष्णु और शिव की पूजा

घर में दीपक जलाना

दान-पुण्य करना

सत्य, संयम और भक्ति का पालन

नकारात्मक विचारों से दूरी

इस समय किए गए शुभ कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है।

होलाष्टक में क्या नहीं करना चाहिए?

परंपरागत मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के दौरान—

नए कार्यों की शुरुआत

विवाह, मुंडन जैसे मांगलिक संस्कार

बड़ा निवेश या गृह प्रवेश

इन कार्यों से बचना चाहिए और आत्मशुद्धि पर ध्यान देना चाहिए।

होलाष्टक का धार्मिक महत्व

होलाष्टक का संबंध प्रह्लाद और होलिका की कथा से जुड़ा हुआ है। यह समय हमें सिखाता है कि—

सत्य की हमेशा विजय होती है

भक्ति से हर संकट दूर होता है

अहंकार और बुराई का अंत निश्चित है

होलाष्टक आत्मचिंतन, भक्ति और संयम का प्रतीक है।

होली से पहले होलाष्टक का महत्व

होलाष्टक के बाद आने वाला पर्व होली प्रेम, भाईचारे और रंगों का उत्सव है।

होलाष्टक हमें अंदर से शुद्ध करता है, ताकि हम होली को पूरे उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा के साथ मना सकें।

होलाष्टक 2026 आध्यात्मिक शुद्धि, संयम और भक्ति का विशेष समय है। इस अवधि में भगवान का स्मरण, दान-पुण्य और सकारात्मक सोच अपनाने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

होलिका दहन के साथ बुराई का अंत और अच्छाई की विजय का संदेश मिलता है।

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