द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026: तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, चंद्रोदय समय और व्रत का महत्व

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 भगवान गणेश को समर्पित एक अत्यंत शुभ व्रत है, जो फरवरी महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाएगा। इस दिन गणपति पूजन, उपवास और रात्रि में चंद्र दर्शन करने से जीवन के सभी संकट, बाधाएं और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। जानिए द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय, पूजा विधि, व्रत नियम, धार्मिक महत्व और इस व्रत से मिलने वाले लाभ विस्तार से।

Published On 2026-02-02 16:51 GMT   |   Update On 2026-02-02 16:51 GMT

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026: तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत का महत्व

Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2026 in Hindi — हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है। यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। फरवरी 2026 में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जो विशेष रूप से विघ्नहर्ता गणेश जी की कृपा प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से जीवन के कष्ट, बाधाएं और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 कब है?

साल 2026 में द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत—

तारीख: 5 फरवरी 2026, गुरुवार

पंचांग के अनुसार उदया तिथि मान्य होने के कारण इसी दिन व्रत और पूजा की जाएगी।

इस दिन रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त

पूजा का श्रेष्ठ समय: पूरे दिन भगवान गणेश की पूजा की जा सकती है

चंद्रोदय समय: रात्रि लगभग 09:30 बजे के बाद

चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलना शुभ माना जाता है।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार—

यह व्रत भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय है

संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से सभी संकटों का नाश होता है

नौकरी, व्यापार और शिक्षा में सफलता मिलती है

मानसिक तनाव और भय से मुक्ति मिलती है

घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है

“संकष्टी” का अर्थ ही होता है — संकटों से मुक्ति।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें

घर के मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें

गणेश जी को दूर्वा, मोदक, लड्डू और फल अर्पित करें

दीपक जलाकर “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें

दिनभर उपवास रखें

रात्रि में चंद्रमा को जल अर्पित करें

चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करें

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत के लाभ

जीवन की बाधाएं दूर होती हैं

धन और करियर में प्रगति होती है

पारिवारिक समस्याओं से राहत मिलती है

नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है

भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 भगवान गणेश की उपासना और संकटों से मुक्ति पाने का अत्यंत शुभ अवसर है। यदि इस दिन श्रद्धा, नियम और भक्ति भाव से व्रत और पूजा की जाए, तो जीवन में सुख, सफलता और शांति का आगमन होता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है, जो अपने जीवन में आ रही कठिनाइयों से छुटकारा पाना चाहते हैं।

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