अधिक मास शुक्र प्रदोष व्रत 2026: कब है प्रदोष व्रत? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त, विधि और धार्मिक महत्व

अधिक मास शुक्र प्रदोष व्रत 2026 कब है? जानें 12 जून 2026 प्रदोष व्रत की सही तिथि, शुभ पूजा मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत नियम, शिव पूजा का महत्व और धार्मिक मान्यताएं।

Published On 2026-06-02 15:03 GMT   |   Update On 2026-06-02 15:03 GMT

अधिक मास शुक्र प्रदोष व्रत 2026: कब है प्रदोष व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Adhik Maas Shukra Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान भगवान शिव और माता पार्वती माता की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जब प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तो उसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। अधिक मास में पड़ने वाला यह व्रत विशेष पुण्यदायी माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से सुख, समृद्धि, वैवाहिक जीवन में खुशहाली और भगवान शिव की कृपा प्राप्त हो सकती है।

शुक्र प्रदोष व्रत 2026 डेट (Shukra Pradosh Vrat 2026 Date)

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 12 जून को रात 07 बजकर 36 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 13 जून को शाम 04 बजकर 07 मिनट पर होगा। ऐसे में 12 जून को शुक्र प्रदोष व्रत किया जाएगा।

प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त

प्रदोष व्रत में सूर्यास्त के बाद का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

शुभ पूजा समय

सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करें।

इसी समय शिवलिंग पर अभिषेक और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है।

स्थानीय स्थान और पंचांग के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है।

शुक्र प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त 2026

पंचांग के मुताबिक इस दिन महादेव की पूजा करने का समय शाम को 07 बजकर 36 मिनट से 09 बजकर 20 मिनट तक है। इस बीच में आप पूजा- अर्चना कर सकते हैं।

शुक्र प्रदोष व्रत धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार अधिक मास के शुक्र प्रदोष व्रत का पालन करने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत दांपत्य जीवन में सुख, आर्थिक उन्नति, मानसिक शांति और परिवार की समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में शिव पूजा करने से पापों का क्षय होता है और साधक को पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

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