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Published On 2026-05-11 12:56 GMT   |   Update On 2026-05-11 12:56 GMT

अपरा एकादशी 2026: कब है, शुभ मुहूर्त, पारण समय, मंत्र और भगवान विष्णु की आरती

Apara Ekadashi 2026 Date, Paran Time, Mantra & Significance: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत भगवान भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को श्रद्धा से करने पर पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का आगमन होता है। अपरा एकादशी का महत्व पद्म पुराण में भी बताया गया है, जहां इसे अश्वमेध यज्ञ के समान फल देने वाला व्रत कहा गया है। पुराणों के अनुसार इस एकादशी पर भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा होती है। अपरा एकादशी के अलावा इसे जलक्रीड़ा एकादशी, अचला एकादशी और भद्रकाली एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं कब अपरा एकादशी तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण समय…

अपरा एकादशी 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार—

अपरा एकादशी व्रत: 13 मई 2026 (बुधवार)

एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 मई 2026 दोपहर 2:52 बजे

एकादशी तिथि समाप्त: 13 मई 2026 दोपहर 1:29 बजे तक

उदया तिथि के अनुसार 13 मई को अपरा एकादशी व्रत रखा जाएगा।

अपरा एकादशी शुभ मुहूर्त २०२६

ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 08 मिनट से 04 बजकर 50 मिनट तक विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 33 मिनट से 03 बजकर 27 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 07 बजकर 02 मिनट से 07 बजकर 23 मिनट तक निशिता मुहूर्त – रात 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 38 मिनट तक

अपरा एकादशी 2026 पारण का समय (Apara Ekadashi 2026 Paran Time)

द्रिक पंचांग के अनुसार अपरा एकादशी के व्रत का पारण 14 मई 2026 को किया जाएगा। पारण का समय 05:32 ए एम से 08:15 ए एम तक है

एकादशी व्रत के प्रभावशाली मंत्र श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।

हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

ॐ नारायणाय विद्महे।

वासुदेवाय धीमहि ।

तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

ॐ विष्णवे नम: धन-समृद्धि मंत्र

ॐ भूरिदा भूरि देहिनो , मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि । ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि

लक्ष्मी विनायक मंत्र दन्ता भये चक्र दरो दधानं, कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्। धृता ब्जया लिंगितमब्धि पुत्रया, लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।। विष्णु के पंचरूप मंत्र ॐ अं वासुदेवाय नम:।। ॐ आं संकर्षणाय नम:।। ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:।। ॐ अ: अनिरुद्धाय नम

एकादशी माता की आरती लिरिक्स (Ekadashi Mata Lyrcis

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता । विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।। ॐ।। तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी । गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी ।।ॐ।। मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी। शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई।। ॐ।। पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है, शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै ।। ॐ ।। नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै। शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै ।। ॐ ।। विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी, पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की ।। ॐ ।। चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली, नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली ।। ॐ ।। शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी, नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी।। ॐ ।। योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी। देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी ।। ॐ ।। कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए। श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए।। ॐ

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।

इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला।। ॐ ।।

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।

रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी ।। ॐ ।।

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।

पावन मास में करूं विनती पार करो नैया ।। ॐ ।।

परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।।

शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी ।। ॐ ।।

जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।

जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै।। ॐ ।।

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