Hanuman Jayanti 2026: बजरंग बाण पाठ, पूजा विधि, लाभ, मंत्र और आरती – जानें पूरी संपूर्ण जानकारी

Hanuman Jayanti 2026 Bajrang Baan, Puja Vidhi & Benefits: साल 2026 में हनुमान जयंती 2 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस पावन अवसर पर बजरंग बाण का पाठ विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। जानें बजरंग बाण का महत्व, सही पाठ विधि, हनुमान जी की पूजा विधि, शक्तिशाली मंत्र, आरती और इसके अद्भुत लाभ। धार्मिक मान्यता के अनुसार बजरंग बाण का जाप करने से जीवन के संकट, भय, नकारात्मक ऊर्जा और बाधाएं दूर होती हैं तथा आत्मविश्वास, साहस और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। पढ़ें हनुमान जयंती 2026 से जुड़ी संपूर्ण जानकारी और आसान उपाय।

Published On 2026-04-01 15:25 GMT   |   Update On 2026-04-01 15:25 GMT

हनुमान जयंती 2026: बजरंग बाण पाठ, पूजा विधि, लाभ, मंत्र और आरती

Hanuman Jayanti 2026 Bajrang Baan, Puja Vidhi & Benefits: हनुमान जयंती भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। साल 2026 में यह पर्व 2 अप्रैल (गुरुवार) को मनाया जाएगा। इस दिन भक्त बजरंगबली की विशेष पूजा करते हैं और बजरंग बाण का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि बजरंग बाण का जाप करने से जीवन के कष्ट, भय और बाधाएं दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। वहीं कार्तिक मास में पड़ने वाली जयंती का पर्व दक्षिण भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जी की विधिवत पूजा करने के साथ हनुमान चालीसा, बजरंग बाण का पाठ करने से रोग, दोष और भय से मुक्ति मिल सकती है। जीवन में खुशियों की दस्तक हो सकती है। इसके साथ ही कुंडली में ग्रहों की स्थिति मजबूत हो सकती है। आइए जानते हैं संपूर्ण बजरंग बाण, विधि और लाभ ….

बजरंग बाण का महत्व

यह भगवान हनुमान को समर्पित एक शक्तिशाली स्तोत्र है

नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं को दूर करता है

संकट और डर से मुक्ति दिलाता है

तुरंत फल देने वाला पाठ माना जाता है

बजरंग बाण को हनुमान चालीसा से अधिक उग्र और प्रभावशाली माना जाता है, जिसका उपयोग विशेष परिस्थितियों में किया जाता है।

बजरंग बाण करने की विधि (Bajrang Baan Vidhi)

हनुमान जयंती के दिन सुबह उठकर स्नान कर लें। इसके बाद आसन में बैठ जाएं और हनुमान जी का मनन कर लें। फिर हनुमान जी के साथ प्रभु श्री राम और माता सीता की पूजा कर लें। घी का दीपक और धूप जलाने के बाद फूल, माला, सिंदूर और भोग चढ़ाएं। इसके बाद रुद्राक्ष की माला या फिर ऐसे ही बजरंग बाण का पाठ करें।

बजरंग बाण पाठ के लाभ

जीवन के संकट और परेशानियां दूर होती हैं

शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा

आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि

मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा

मान्यता है कि नियमित पाठ से व्यक्ति का जीवन सुखमय बन सकता है।

संपूर्ण बजरंग बाण लिरिक्स (Bajrang Baan Lyrics)

दोहा

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।”

तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥”

चौपाई

जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी।।

जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महासुख दीजै।।

जैसे कूदि सिन्धु महि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।

आगे जाई लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।।

जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा।।

बाग़ उजारि सिन्धु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा।।

अक्षयकुमार को मारि संहारा। लूम लपेट लंक को जारा।।

लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर में भई।।

अब विलम्ब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु उर अन्तर्यामी।।

जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होय दुख हरहु निपाता।।

जै गिरिधर जै जै सुखसागर। सुर समूह समरथ भटनागर।।

ॐ हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहिंं मारु बज्र की कीले।।

गदा बज्र लै बैरिहिं मारो। महाराज प्रभु दास उबारो।।

ऊँकार हुंकार प्रभु धावो। बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो।।

ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ऊँ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा।।

सत्य होहु हरि शपथ पाय के। रामदूत धरु मारु जाय के।।

जय जय जय हनुमन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।।

पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत हौं दास तुम्हारा।।

वन उपवन, मग गिरिगृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।।

पांय परों कर ज़ोरि मनावौं। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं।।

जय अंजनिकुमार बलवन्ता। शंकरसुवन वीर हनुमन्ता।।

बदन कराल काल कुल घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक।।

भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बेताल काल मारी मर।।

इन्हें मारु तोहिं शपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की।।

जनकसुता हरिदास कहावौ। ताकी शपथ विलम्ब न लावो।।

जय जय जय धुनि होत अकाशा। सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा।।

चरण शरण कर ज़ोरि मनावौ। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं।।

उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई। पांय परों कर ज़ोरि मनाई।।

ॐ चं चं चं चं चपत चलंता। ऊँ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता।।

ऊँ हँ हँ हांक देत कपि चंचल। ऊँ सं सं सहमि पराने खल दल।।

अपने जन को तुरत उबारो। सुमिरत होय आनन्द हमारो।।

यह बजरंग बाण जेहि मारै। ताहि कहो फिर कौन उबारै।।

पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।।

यह बजरंग बाण जो जापै। ताते भूत प्रेत सब काँपै।।

धूप देय अरु जपै हमेशा। ताके तन नहिं रहै कलेशा।।

दोहा

प्रेम प्रतीतहि कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान।

तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान।

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