धुंडिराज चतुर्थी 2026: कब है व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और गणेश जी की आरती

Dhundiraj Chaturthi 2026 Date & Time: फाल्गुन शुक्ल पक्ष की धुंडिराज चतुर्थी 2026 कब है? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत नियम, मंत्र और भगवान गणेश की आरती। इस दिन गणेश जी के ढुंडिराज स्वरूप की पूजा करने से विघ्न दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

Published On 2026-02-20 14:57 GMT   |   Update On 2026-02-20 14:57 GMT

धुंडिराज चतुर्थी 2026: तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और गणेशा आरती

Dhundiraj Chaturthi 2026 Date & Time: हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। विशेष रूप से फाल्गुन मास की चतुर्थी को धुंडिराज चतुर्थी कहा जाता है, जो भक्तों के लिए सुख-समृद्धि, भाग्य और विघ्नों के नाश का शुभ दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

इस लेख में जानिए — धुंडिराज चतुर्थी 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और गणेशा आरती।

Dhundiraj Chaturthi 2026: हिन्दू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि को ढुण्ढिराज चतुर्थी का व्रत किया जाता है। इस व्रत को करने से गणेश की जी असीम कृपा प्राप्त होती है। मत्स्यपुराण में इस चतुर्थी को मनोकामना पूर्ण करने वाली चतुर्थी मानी जाती है। इस दिन भगवान गणेश के ढुण्ढिराज स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। ढुण्ढिराज चतुर्थी का व्रत रखने के साथ रात के समय एक बार भोजन करने से गणेश जी अति प्रसन्न होते हैं। इसके साथ ही जीवन में खुशियों की दस्तक होने के साथ कई मनोरथ सिद्ध हो सकते हैं। आइए जानते हैं ढुण्ढिराज चतुर्थी व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और व्रत कथा।

ढुण्ढिराज चतुर्थी तिथि 2026 (Dhundiraj Chaturthi 2026 Date)

द्रिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 20 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 37 मिनट पर आरंभ हो रही है, जो 21 फरवरी को दोपहर 01 बजे समाप्त हो रही है। ऐसे में 21 फरवरी को ढुण्ढिराज चतुर्थी का व्रत रखा जा रहा है।

शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)

धुंडिराज चतुर्थी के शुभ मुहूर्त में पूजा-पाठ और मंत्र जाप करना अधिक फलदायी माना जाता है।

सुबह से दोपहर तक का समय गणेश पूजा के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है।

माना जाता है कि सूर्य की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।

धुंडिराज चतुर्थी के मंत्र

धुंडिराज चतुर्थी के दिन गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए इन मंत्रों का जाप करें:

ॐ गं गणपतये नमः

ॐ एकदन्ताय विद्महे…

गजाननाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्

इन मंत्रों का जाप श्रद्धा और भक्ति से करने पर मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

गणेश भगवान की आरती (Ganesh Ji Ki Aarti)

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

एकदंत, दयावन्त, चार भुजाधारी,

माथे सिन्दूर सोहे, मूस की सवारी।

पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा,

लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा।। ..

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।

‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ..

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।

कामना को पूर्ण करो जय बलिहारी।

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।

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