शुक्र प्रदोष व्रत 2026: तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, नियम और धार्मिक महत्व
शुक्र प्रदोष व्रत 2026 (Shukra Pradosh Vrat in Hindi) भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पुण्यकारी व्रत है, जो शुक्रवार के प्रदोष काल में रखा जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 16 जनवरी और 30 जनवरी को मनाया जाएगा। इस लेख में जानिए शुक्र प्रदोष व्रत की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, संपूर्ण पूजा विधि, व्रत के नियम, धार्मिक महत्व और इससे मिलने वाले लाभ। शुक्र प्रदोष व्रत करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति, धन-समृद्धि, सौभाग्य, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यदि आप शिव भक्ति, व्रत विधि और हिंदू त्योहारों की जानकारी चाहते हैं तो यह लेख आपके लिए बेहद उपयोगी है।

शुक्र प्रदोष व्रत 2026: तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व
Shukra Pradosh Vrat 2026 in Hindi भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र व्रत है, जिसे प्रदोष काल में रखा जाता है।
विशेष रूप से जब यह व्रत शुक्रवार को पड़े, तो इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है और इसे सौभाग्य, समृद्धि, वैवाहिक सुख और जीवन में सकारात्मक बदलाव का शुभ अवसर माना जाता है।
जनवरी 2026 में शुक्र प्रदोष व्रत की तारीख
जनवरी 2026 में दो बार शुक्र प्रदोष व्रत का शुभ संयोग बन रहा है — यह बेहद शुभ माना जाता है:
पहला शुक्र प्रदोष
16 जनवरी 2026 (शुक्रवार)
प्रदोष काल: शाम 5:21 बजे से रात 8:00 बजे तक
दूसरा शुक्र प्रदोष
30 जनवरी 2026 (शुक्रवार)
प्रदोष काल: शाम 5:32 बजे से रात 8:08 बजे तक
जनवरी में दो बार शुक्र प्रदोष का संयोग इसलिए भी शुभ माना जाता है क्योंकि यह भगवान शिव की आराधना और भक्ति के लिए विशेष अवसर है।
प्रदोष काल क्या होता है?
प्रदोष काल हर दिन सूर्यास्त के आसपास का समय होता है — यह वह पवित्र समय है जब दिन और रात के बीच का संगम होता है।
इस समय भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
शुक्र प्रदोष को शुक्रवार के दिन मनाने से माँ लक्ष्मी का भी आशीर्वाद मिलता है, जिससे वैवाहिक जीवन, धन-समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
शुक्र प्रदोष व्रत को रखने से व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार के शुभ प्रभाव देखने को मिलते हैं:
भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
वैवाहिक जीवन में सौभाग्य और शांति आती है।
घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
जीवन की कठिनाइयाँ और बाधाएँ कम होती हैं।
नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
यह व्रत न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग है, बल्कि मन, मनोबल और जीवन में संतुलन लाने का एक प्रभावशाली साधन भी है।
शुक्र प्रदोष व्रत पूजा विधि (कैसे करें)
शुक्र प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा सरल और प्रभावी विधि से की जा सकती है:
प्रातः नींद से उठकर शुद्ध स्नान करें।
शिवलिंग या शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
प्रदोष काल से पहले पूजा स्थल को साफ़ करें।
ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें।
बेलपत्र, दूध-दही-घी-शहद से अभिषेक करें।
फल, फूल और दीपक अर्पित करें।
अंत में प्रसाद वितरित करें और जरूरतमंद को दान दें।
पूरे दिन उपवास रखना श्रेष्ठ माना जाता है, लेकिन स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार भी किया जा सकता है।
व्रत के नियम और सावधानियाँ
प्रदोष के दिन मांसाहार, मद्यपान, झूठ, क्रोध आदि से बचें।
पूजा स्थल को साफ़ रखें और भक्ति भाव से मंत्रों का उच्चारण करें।
दिन भर संयम, दया और सत्कार्य पर ध्यान दें।
ये नियम व्रत के शुभ फल को और बढ़ाते हैं।
शुक्र प्रदोष व्रत के लाभ
मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
वैवाहिक जीवन में सौभाग्य और सामंजस्य आता है।
धन-समृद्धि और कार्यक्षेत्र में सफलता के अवसर मिलते हैं।
जीवन में तनाव और परेशानियाँ कम होती हैं।
परिवार में सुख-शांति और सामंजस्य बना रहता है।
शुक्र प्रदोष व्रत 2026 एक अत्यंत शुभ और फलदायी व्रत है। जनवरी महीने में 16 जनवरी और 30 जनवरी को यह व्रत मनाया जा रहा है — दोनों ही दिन शुक्रवार के प्रदोष काल में पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
यदि आप श्रद्धा, नियम और सही विधि से यह व्रत करते हैं, तो शिव की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और सफलता प्राप्त होती है। यह व्रत आपके जीवन को सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन से भर सकता है।

