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Vastu Tips: घर में किस दिशा में लगाना चाहिए शीशा? इन 5 गलतियों से बढ़ सकती है नकारात्मक ऊर्जा

Vastu Tips: घर में शीशा लगाने की सही दिशा क्या है और किन जगहों पर आईना लगाने से बचना चाहिए? जानें उत्तर-पूर्व दिशा, बेडरूम, मुख्य द्वार, किचन और टूटे शीशे से जुड़े वास्तु नियम।

Vastu Tips: घर में किस दिशा में लगाना चाहिए शीशा? इन 5 गलतियों से बढ़ सकती है नकारात्मक ऊर्जा

Vastu Shastra: घर की सजावट में शीशे का इस्तेमाल आम बात है। ड्रेसिंग रूम से लेकर बेडरूम, बाथरूम और लिविंग रूम तक लगभग हर घर में आईना देखने को मिलता है। लेकिन वास्तु शास्त्र में शीशे को केवल सजावट की चीज नहीं माना जाता। इसकी दिशा और स्थान को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं।

वास्तु के अनुसार सही जगह पर लगाया गया शीशा घर में रोशनी और सकारात्मकता बढ़ाने में सहायक माना जाता है, जबकि गलत जगह पर लगा आईना नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। खासकर बेड के सामने या मुख्य दरवाजे के ठीक सामने शीशा लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।

घर में शीशा किस दिशा में लगाना चाहिए?

वास्तु की मान्यताओं के अनुसार उत्तर और पूर्व दिशा की दीवार पर शीशा लगाना शुभ माना जाता है। उत्तर दिशा को धन और समृद्धि से जोड़ा जाता है, जबकि पूर्व दिशा सूर्य और सकारात्मक ऊर्जा से संबंधित मानी जाती है।

शीशा ऐसी जगह लगाना बेहतर माना जाता है जहां उसमें घर का साफ-सुथरा और रोशन हिस्सा दिखाई दे। इससे कमरे में रोशनी और खुलापन महसूस होता है।

1. मुख्य दरवाजे के ठीक सामने न लगाएं शीशा

वास्तु के अनुसार घर के मुख्य दरवाजे के ठीक सामने शीशा लगाने से बचना चाहिए। मान्यता है कि दरवाजे से घर में प्रवेश करने वाली सकारात्मक ऊर्जा शीशे से प्रतिबिंबित होकर वापस बाहर जा सकती है।

हालांकि प्रवेश द्वार के बगल की दीवार पर शीशा लगाया जा सकता है, बशर्ते वह सीधे मुख्य दरवाजे का प्रतिबिंब न बना रहा हो।

2. बेड के सामने शीशा लगाने से बचें

बेडरूम में शीशे की स्थिति को लेकर वास्तु में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। बेड के ठीक सामने ऐसा आईना नहीं होना चाहिए जिसमें सोते समय व्यक्ति का प्रतिबिंब दिखाई दे।

वास्तु मान्यता के अनुसार इससे नींद में बाधा और मानसिक बेचैनी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। व्यावहारिक तौर पर भी रात में अचानक आईने में अपना प्रतिबिंब दिखना असहज लग सकता है।

अगर बेडरूम में ड्रेसिंग मिरर लगाना जरूरी है, तो उसे इस तरह रखें कि बिस्तर का प्रतिबिंब उसमें न आए। वार्डरोब के अंदर लगा ऐसा शीशा जिसे जरूरत न होने पर बंद किया जा सके, एक व्यावहारिक विकल्प है।

3. दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिशा में शीशा लगाने से बचें

वास्तु मान्यताओं में दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिशा को शीशे के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। विशेष रूप से दक्षिण-पश्चिम दिशा को घर की स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए इस हिस्से में अत्यधिक प्रतिबिंब वाली वस्तुएं लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।

घर में शीशा लगाने से पहले उसकी दिशा के साथ-साथ यह भी देखें कि वह किस चीज का प्रतिबिंब बना रहा है।

4. टूटे या चटके हुए शीशे घर में न रखें

वास्तु में टूटे, चटके या धुंधले शीशे को घर में रखना अच्छा नहीं माना जाता। मान्यता है कि ऐसा शीशा घर के वातावरण में नकारात्मकता और अस्थिरता का प्रतीक बन सकता है।

व्यावहारिक रूप से भी टूटे शीशे से चोट लगने का खतरा रहता है और उसमें दिखाई देने वाला प्रतिबिंब विकृत होता है। इसलिए शीशा टूट जाए या उसमें बड़ी दरार आ जाए तो उसे बदल देना बेहतर है।

5. दो शीशे आमने-सामने न लगाएं

वास्तु के अनुसार दो बड़े शीशों को बिल्कुल आमने-सामने लगाने से बचना चाहिए। इससे लगातार प्रतिबिंब बनता है, जिससे कमरे का दृश्य असहज और अव्यवस्थित लग सकता है।

अगर घर में पहले से दो शीशे आमने-सामने लगे हैं, तो उनमें से किसी एक को दूसरी दिशा में करना या उसका कोण बदलना आसान उपाय हो सकता है।

किस कमरे में किस तरह लगाएं शीशा?

बेडरूम

शीशा उत्तर या पूर्व की दीवार पर लगाया जा सकता है, लेकिन उसका प्रतिबिंब सीधे बेड पर नहीं पड़ना चाहिए।

लिविंग रूम

लिविंग रूम में शीशा ऐसी जगह लगाया जा सकता है जहां उससे प्राकृतिक रोशनी कमरे में फैलती हो। उत्तर या पूर्व दिशा को प्राथमिकता देने की वास्तु सलाह दी जाती है।

बाथरूम

बाथरूम में वॉश बेसिन के ऊपर शीशा आमतौर पर उपयोगी होता है। वास्तु मान्यताओं में उत्तर या पूर्व की दीवार को प्राथमिकता दी जाती है।

डाइनिंग रूम

डाइनिंग एरिया में ऐसा शीशा जो साफ-सुथरी डाइनिंग टेबल का प्रतिबिंब दिखाए, कुछ वास्तु परंपराओं में शुभ माना जाता है। इसे समृद्धि और भोजन की प्रचुरता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

किचन

किचन में बड़े शीशे लगाने से आमतौर पर बचने की सलाह दी जाती है। खासकर ऐसा आईना न लगाएं जिसमें गैस स्टोव या आग का सीधा प्रतिबिंब दिखाई दे।

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